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बेलाल की थी करतूत, लेकिन बाबूलाल बिना कारण थे बेहाल

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वर्तमान में झारखंड का हर मुद्दा या तो भाजपा के पूर्व की रघुवर सरकार के कार्यशैली पर सवाल करती है या फिर केंद्र की भाजपा सत्ता की बेरुखी पर सवाल उठाता है। ऐसे में झारखंड में भाजपा खुद मुद्दा बन गयी है। 

शेख बेलाल की गिरफ्तारी ने भाजपा की बधाई बहाली

रांची। राजनीति में शाम, दाम दंड भेद सभी जायज़ होते हैं। इस तथ्य को जेवीएम से भाजपा गए बाबूलाल मरांडी ने किसी घरेलू मामलों में हुए हत्याकांड को राजनीति रंग देने का प्रयास कर साबित कर दिया है। ज्ञात हो कि भाजपा के राजनितिक षड्यंत्र में निशाने पर कोई और नहीं बल्कि झारखंड के मुखिया हेमंत सोरेन थे। जहाँ उनपर सुनियोजित तौर पर हमला हुआ -बाल-बाल बचे। राज्य में यह पहला मौका था जब जनहित मुद्दों के अभाव में, भाजपा में खीजवश गैर तथ्यात्मक मुद्दे के मातहत तल्ख तेवर दिखें। विरोध के स्वरों में सत्ता से दूरी की तड़प साफ़ तौर उभर कर सतह पर आया। 

बीजेपी के पास मुद्दों का घोर अभाव

वर्तमान में झारखंड का हर मुद्दा एक तरफ भाजपा के पूर्व की डबल इंजन रघुवर सरकार के कार्यशैली पर सवाल करती है। तो वहीं दूसरी तरफ केंद्र की भाजपा सत्ता की बेरुखी पर सवाल उठाता है। ऐसे में विपक्ष की भूमिका के लिए जद्दोजहद करने वाली भाजपा झारखंड में खुद जन मुद्दा बनकर उभरी है। चूँकि राज्य के शासन में भाजपा की सत्ता 14 वर्ष रही है। और वह इन वर्षों में जनता के समस्याओं को सुलझाने के बजाय स्वयं जन समस्याओं का जनक रहे हैं। और राज्य की सत्ता में यकायक आन्दोलनकारी पृष्ठभूमि की दल को जनता ने राज्य की सत्ता सौंपी है।

मसलन, प्रदेश भाजपा को राज्य में विपक्षी हलचल मचाने के लिए मुद्दे ढूंढने से भी नहीं मिल रहे। नतीजतन, भाजपा द्वारा हेमन्त सरकार को घेरने के लिए खिलाफ में उठाये गए तमाम मुद्दे न केवल तथविहीन बल्कि अर्नगल भी साबित हुई है। लोकतंत्र के भावनाओं पर चोट साबित हुई है। 

किसी मामले में सरकार पर टिप्पणी उस हालात में हो सकती है जा वह घटने के प्रति लापरवाह हो। लेकिन पूरे प्रकरण में सरकार का रुख ऐसा नहीं देखा गया। बाबूलाल मरांडी का जनता के बीच खूद को काफी परेशान दिखाने का प्रयास किया जाता रहा। हर संभव प्रयास किए जाने के बावजूद भाजपा सरकार को बदनाम न कर सकी, उसे मुंह की खानी पड़ी। 

रामटहल चौधरी काॅलेज छात्रा हत्याकांड पर भाजपाई थे खामोश, लेकिन बेलाल-सूफिया के मामलें में बेहाल

हेमन्त सरकार के कार्यकाल को गलत बताने के प्रयास में भाजपा के नेताओं ने जो दिलचस्पी दिखाई, काश ऐसी ही दिलचस्पी एनडीए सरकार के कार्यकाल में दिखायी गयी होती, तो रामटहल चौधरी इंजीनियरिंग काॅलज की छात्रा को बहुत पहले न्याय मिल गया होता। लेकिन, भाजपा के तत्कालीन सांसद रामटहल चौधरी के बंद ज़ुबान तब खुली जब टिकट बँटवारे में उनका पत्ता कट हो गया। माननीय सांसद ने उस वक़्त भाजपा के अन्य नेताओं से अधिक जवान होने तक की बात कही थी।

मसलन, भाजपा को जब पता चला कि कांड के पीछे कोई और नहीं, बल्कि सूफ़िया के पतिदेव पिठोरिया के चंदवे गांव निवासी शेख बेलाल है, तो मुद्दा न मिलने की स्थिति में भाजपाई शांत हो गए। यकीन मृतिका यदि हिन्दू होती तो वे अभी गाल से गाल दिए होते! झारखंड पुलिस शेख बेलाल समेत उसकी पहली पत्नी और बेटे को हिरासत में लिया है।

घरेलू हिंसा की रोकथाम की जितनी जवाबदेही सरकार की होती है उतना ही जवाबदेही समाज व  प्रबुद्धजीवियों की भी होती है। लेकिन किसी गुपचुप घटना को राजनीतिक रंग देकर अनुसूचित जाती-जनजाति के नेताओं या बुद्धिजीवियों पर हमला बोलना किसी मायने में सही नहीं ठहराया जा सकता है। कई जटिल मामलों के उद्भेदन में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ सकती है। ऐसे में एक संवेदन शील सरकार को टार्गेट किया जाना ओंछी राजनीति का परिचायक है। ऐसे में सरकार से माफ़ी माँगना भाजपा की नेति जिम्मेदारी हो सकती है।  

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