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भ्रष्टाचार के मामले में देश की गिरती स्थिति से साफ संकेत, “मोदी सरकार की साख अब वैसी नहीं रही”

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भ्रष्टाचार के मामले में -ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में खुलासा, एशिया में सबसे अधिक ‘घूसखोरी हमारे देश में, शिकायत करने में लगता है डर

“भ्रष्टाचार के मामले में हर साल रिपोर्ट पेश करती है ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल”

रांची। भाजपा के तमाम बड़े नेता हमेशा यही दावा करते रहे है कि मोदी सरकार के नेतृत्व में देश को पिछले 6 वर्षों में पारदर्शी एवं जवाबदेह सरकार मिली है। दावा भी इतना मजबूत कि उनके कार्यकर्ता सरकार की इन उपलब्धियों की जानकारी घर-घर तक पहुंचाते रहे हैं। भाजपा हमेशा कहती रही है कि आने वाले समय में मोदी सरकार और बेहतर तरीके से काम कर भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। भाजपा का यह दावा सच तो हो रहा है, लेकिन ठीक उलटे रूप में। 

दरअसल, देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के भजपा के दावे को अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पूरी तरह खारिज करती है। बीते दिनों भ्रष्टाचार के मामले में संस्था की जारी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश में भ्रष्टाचार और व्यापक रूप से बड़ा है। यह बढ़ोतरी दर इतना अधिक है कि पूरे एशिया में भारत पहले स्थान पर है। भ्रष्टाचार के मामले में एशिया के टॉप देशों की सूची में भारत की स्थिति साफ बताती है कि अपने ही नागरिकों के समक्ष मोदी सरकार की साख काफी गिरी है।

देशों में भ्रष्टाचार की स्थिति का संस्था करती है मूल्यांकन

ट्रान्सपेरेंसी इंटरनेशनल एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्था है। जो भ्रष्टाचार के निवारण आदि पर अपना ध्यान केन्द्रित करती है। यह संस्था हर वर्ष एक रिपोर्ट पेश करती है, जिसमें विश्व के विभिन्न देशों में भ्रष्टाचार की स्थिति का मूल्यांकन होता है। संस्था का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय जर्मनी की राजधानी बर्लिन में है।

12 माह में भ्रष्टाचार बढ़ने की बात काफी चिंतनीय

एशिया में भ्रष्टाचार को लेकर संस्था ने एक रिपोर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक एशिया में सबसे अधिक भ्रष्टाचार दर भारत में है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में भ्रष्टाचार दर 39 % है जो एशिया में सबसे अधिक है। एशिया में सबसे अधिक भारतीयों ने ही अपने व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल कर सरकारी कार्यालयों में अपना काम पूरा करवाया है। यह करीब 46 % के करीब है। सर्वे में भाग लेने वाले लोगों में करीब 89 % लोगों का मानना है कि सरकारी भ्रष्टाचार देश की बहुत बड़ी समस्या है। करीब 47 % लोगों का मानना है कि पिछले 12 महीनों में देश में भ्रष्टाचार काफी बढ़ा है। लेकिन शिकायत करने से भी लोगों को डर काफी लगता है।

मोदी सरकार की साख वैसी नहीं रही

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल रिपोर्ट से जो तथ्य सामने आता है वह यह है कि मोदी सरकार की साख अपने नागरिकों पर वैसी नहीं रही जैसा शुरुआती दौर में था। दरअसल कई मौके पर केंद्र ने अपने संवैधानिक अधिकारों का गलत प्रयोग किया है। संघीय ढांचे पर जिस तरह से मोदी सरकार ने चोट पहुंचाई है, उसका देश भर में गलत मैसेज गया है। “मोदी सरकार 2” के पहले 100 दिनों में जिस तरह से भ्रष्टाचार पर चोट करने वाली संस्था ‘सूचना का अधिकार’ कानून पर संशोधन किया, इससे मोदी सरकार की काफी किरकिरी हुई। 

भ्रष्टाचार से जुड़े कई संगठनों का कहना है कि पिछले छह  सालों में मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के कानून पर लगातार हमला ही किया है। भ्रष्टाचार और अनियमितता उजागर करने के कारण आरटीआई कार्यकर्ताओं और ह्विसिल ब्लोअरों पर हमला मोदी सरकार में आम हो गयी है। फिर भी केंद्र सरकार ने ह्विसिलब्लोअर सुरक्षा अधिनियम को लागू करने में कभी दिलचस्पी नहीं दिखायी। दूसरी तरफ इसी सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड की योजना लेकर आयी। यह योजना जनता के इस अधिकार का हनन करती है जिससे वे जान सकें कि आखिर कौन राजनीतिक पार्टियों को पैसा दे रहा है।

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