भाजपा की तर्ज पर बाबूलाल का आदिवासी धर्म पर अपना कॉपीराइट थोपने का प्रयास

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आदिवासी धर्म

भाजपा जिस प्रकार हिन्दू धर्म पर अपना कॉपीराइट समझती है ठीक उसी प्रकार बाबूलाल का आदिवासी धर्म पर अपना कॉपीराइट थोपने का प्रयास  

कोरोना संकट के बीच, झारखंड के लिए यूपीएससी के सिविल सेवा परीक्षा-2019 का रिजल्ट खुशख़बरी लेकर कर आया है। आयोग के जारी रिजल्ट के मुताबिक इस साल कुल 829 अभ्यर्थी उतीर्ण हुए हैं। जिसमे झारखंड राँची के अभियार्थी रवि जैन को 9वां, अनुपमा सिंह को 90वां और डॉ आकांक्षा खलखो को 467वां स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही हज़ारीबाग़ के दीपांकर चौधरी 42वां और प्रियंक किशोर को 61वां स्थान प्राप्त हुआ है।

इसी बीच राँची से आने वाली दूसरी खबर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी को कटघरे में खड़ा करती है। झारखंड के आदिवासी समाज ने बाबूलाल मरांडी के बयान “ सरना, सनातन से जुड़ा है और आदिवासियों का राम से गहरा नाता है” का कड़ा विरोध किया है।

आदिवासियों के विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों  ने धर्मगुरु बंधन तिग्गा की अध्यक्षता में बीजेपी के बाबूलाल मरांडी के बयान पर चर्चा का यह विरोध जताया है। इस मुद्दे पर पर डॉ करमा उरांव ने कहा कि ऐसे समय उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि वे विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री रहे हैं। जब आदिवासी समाज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा हैं। और विहिप के साथ धर्मयुद्ध लड़ रहा हैं। ऐसे में हम उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं?

इस बैठक में विभिन्न संस्थान जैसे राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा, आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी जन परिषद, केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी लोहरा समाज, जय आदिवासी केंद्रीय परिषद, झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा, आदिवासी सेना, आदिवासी छात्र संघ, केंद्रीय युवा सरना समिति, लोकत्रांतिक छात्र मोर्चा, आदिवासी भूमिज मुंडा समाज व बेदिया विकास परिषद सहित अन्य कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि व गणमान्य-प्रतिष्ठित जन शामिल थे।

बाबूलाल मरांडी आरएसएस का चोला ओढ़ कर बोल रहे हैं

सभी का कहना था कि बाबूलाल मरांडी आरएसएस का चोला ओढ़ कर बोल रहे हैं। जिसमे वे सरना को सनातन से जोड़ रहे हैं और आदिवासियों का राम से गहरा नाता बताने से नहीं रहे हैं। उनका दलील था कि सरना समाज के पूजा स्थल, विधि-विधान, देवी, देवता और परंपराएं सनातन धर्म से भिन्न हैं। हमारे पूर्वज प्रकृती से सीधा संवाद करते थे और हम उसी की पूजा करते आ रहे हैं। जन्म से मरन तक हमारा हर नेग, सनातन से अलग है। 

मसलन, बाबूलाल जी झारखंड में खुद को सत्ता के साथ जोड़ने के लिए बिना कुतुबमीनार से कूदे पार्टी बदल लिए। फिर धर्म की राजनीति के अंतर्गत सरना का सनातन से गहरा नाता जोड़ने का प्रयास करते दीखते हैं। ऐसे में उन जैसे नेता को समझाना चाहिए कि हिंदुस्तान में धर्म अपना विशेष स्थान रखता है और नेतागिरी से न ही चलता है और न ही बदलता है। जैसे भाजपा हिन्दू धर्म पर अपना कॉपीराइट समझती है, ठीक वैसे ही बाबूलाल जी भी आदिवासी धर्म पर अपना कॉपीराइट थोपने का असफल प्रयास करते दिख रहे हैं। 

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