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कोलेबिरा उपचुनाव एनोस एक्का की लालच का साबुत

कोलेबिरा उपचुनाव : कोलेबिरा की जनता को भ्रष्टाचार, अपराध से आजादी मिलेगी !

विधायक एनोस एक्का के आजीवन कारावास होने के बाद से खाली पड़ी कोलेबिरा सीट पर, संवैधानिक बाध्यता के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की  तिथि 20 दिसंबर एवं मतगणना तिथि 23 दिसंबर मुकर्रर की है। साथ ही इसकी अधिसूचन 26 नवंबर तक जारी होगी। ज्ञात हो कि झारखण्ड में लोहरदगा, पांकी, गोड्डा, लिट्टीपाड़ा, सिल्ली, गोमिया और अब कोलेबिरा मिलकर सातवां उपचुनाव है इसी के साथ सभी राजनैतिक दलों में इस उपचुनाव को लेकर सरगर्मी तेज होती देखी जा रही है।

झारखंड पार्टी के अध्‍यक्ष एनोस एक्का इस कोलेबिरा उपचुनाव में अपनी पत्नी मेनन एक्का को मैदान में उतार रहे हैं। जबकि चर्चा आम थी कि भाजपा मेनन एक्का पर दांव लगायेगी, लगता है इनमें बात नहीं बनी। इधर विपक्षी महागठबंधन से अब‍ तक किसी उम्‍मीदवार का नाम सार्वजनिक नहीं हो पाया है। हलचल इशारा कर रही है कि झामुमो-कांग्रेस दोनों प्रत्याशी देने की तैयारी में हैं जबकि बाबूलालजी अपने चिर परिचय अंदाज में एनोस एक्का को सहयोग कर शायद अप्रत्यक्ष भाजपा को मदद करना चाहते है सुदेश जी ने अबतक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जो भी हो यह उप चुनाव रोमांचकारी होने वाला है।

दिलचस्प बात है कि यदि गोड्डा को अपवाद माना जाए तो, तथ्य उभरकर सामने आता है कि भाजपा के सिवाय सभी अन्य झारखंडी राजनीतिक दलों में ही केवल अयोग्य विधायक मौजूद हैं। इस मामले में भाजपा एकदम दूध की धूली है और उनके विधायक आपराधिक मामलों से कोसों दूर हैं। आंकड़े देख ऐसा भी कयास लगाया जा सकता है कि जिन झारखंडी दलों ने भाजपा को समर्थन दिया उनकी ही नैया डूबी है। ख़ैर जो भी हो इस बार कोलेबिरा की जनता किसी संवेदनशील दल के प्रत्यासी को चुन खुद को आजाद करना चाहेगी। साथ ही गर्व से कहेगी कि उनका विधायक हत्यारा नहीं है। और वह अपने झारखंड को बचाने के लिए प्रतिबद्ध होगा।  

बहरहाल, एनोस एक्का, आजसू जैसे दल अगर अपने झारखंडी पुत्र होने का धर्म निभाते और सत्ता मोह में अपराध को गले लगा भाजपा को साथ न दिए होते, तो रघुवर सरकार इतनी बेदर्दी से झारखंडी अस्मिता को तार-तार करने की स्थिति न होती। अब देखना यह है कि कोलेबिरा की जनता झारखण्ड के भविष्य के मद्देनजर फिर एकला चलो की नीति अपनाती है या फिर किस मजबूत दल पर अपना विश्वास जता झारखण्ड के आदिवासी-मूलवासिओं के पहचान के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोकने में अहम् भूमिका निभाती है।

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