Breaking News
Home / News / Jharkhand / रघुबरदास बाहरियों के मसीहा तो बन गए लेकिन अर्जुन मुंडा झारखंडी न हो सके  

रघुबरदास बाहरियों के मसीहा तो बन गए लेकिन अर्जुन मुंडा झारखंडी न हो सके  

Spread the love

झारखंड में प्रवासी मुख्यमंत्री रघुबरदास के पद भार संभालते ही वे अपने एजेंडे के तहत सिलसिलेवार तौर पर बाहरियों के लिए नीतियाँ बनाने में जुट गए, अबतक प्रयासरत हैं। ज्ञात हो, आते ही उन्होंने स्थानीय निति में गड़बड़ी कर लगभग 75 फीसदी बाहरियों को सरकारी नौकरी प्रसाद की भाँती बाँट दी। वे यहीं नहीं रुके अपने प्रिये बाहरियो के हित के लिए 2016 में ही सीएनटी/एसपीटी अधिनियम में संशोधन का बिल विधान सभा में पेश भी कर दिया। वो तो गनीमत है कि झामुमो के हेमंत सोरेन और उनके तमाम विधायक व तमाम विपक्ष अनुशासनपूर्वक इस संशोधन बिल के आगे चट्टान के भाँती खड़े हो गए और जैसे-तैसे इस समस्या से यहाँ की जनता को निजात दिलाये। इसके बावजूद रघुबरदास चोर दरवाजे से दुसरे विकल्पों के साथ अपने एजेंडे पर लगातार भीड़े हुए हैं। हैरानी इस बात की है कि इतना हंगामा बरपने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के जुबान से एक शब्द न निकला।

राघुबरदास बनाम अर्जुन मुंडा

गौर करने वाली बात यह है कि एक ही पार्टी के इन दोनों मुख्यमंत्रियों में कितना फर्क है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि रघुबरदास ने अपने मूल मतदाताओं (बाहरी) को खुश करने के लिए, उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा स्थानीय नीति/नियोजन में फेर बदल कर डाली। जबकि अर्जुन मुंडा एक झारखंडी आदिवासी नेता होने के बावजूद अपने 6 वर्ष के विघ्नरहित कार्यकाल में यहां के आदिवासी-मूलवासियों के हितों की रक्षा के कोई मजबूत कदम न उठा सके। साथ ही सत्ता मोह में वे हमेशा बाहरी लोगों के दबाव में रहे और स्थानीय नीति एवं नियोजन नीति बनाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाए। इससे यह परिभाषित होता है कि भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश इकाई में आदिवासी-मूलनिवासी नेताओं की नहीं सुनी जाती है। वे इस दल में केवल आदिवासियों को बरगला कर वोट लेने वाले चेहरा से अधिक कुछ नहीं होते। सत्ता हासिल करते ही सभी झारखंडी मूल के नेता हासिये पर धकेल दिए जाते हैं। जिसका खामियाजा आज झारखंड के 70 फ़ीसदी आदिवासी-मूलनवासी खतियानधारी भुगत रहे हैं।

  • 490
    Shares

Check Also

सदान मोर्चा

सदान व मूलवासियों को उनके अधिकार दिलाएंगे हेमत सोरेन 

Spread the loveछोटा नागपुर और और उसके आसपास के क्षेत्र, ऐतिहासिक रूप से झारखंड के …

हेमंत सोरेन ने कहा

हेमंत सोरेन ने ओबीसी को उनका हक़ 27% आरक्षण देने के लिए कसी कमर

Spread the loveहेमंत सोरेन ने कहा कि वे ओबीसी के 27% आरक्षण को लेकर गंभीर …

9 comments

  1. Pingback: कृषि उत्पादन में कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग और झारखंड के 129 प्रखंड सूखाड़

  2. Pingback: कोलेबिरा उपचुनाव : एनोस एक्का को शायद सामाजिक फूट डालने की भी सजा है!

  3. Pingback: भाजपा के शासनकाल में सबसे अधिक ठगे गए झारखंड के मूलवासी !

  4. Pingback: रघुबर दास के कुछ नेक इरादे (नेक इरादे, हौसले बुलंद, बन रहा है न्यू झारखंड) भाग-1

  5. Pingback: लुगुबुरु घंटाबाड़ी राजकीय उत्सव: धार्मिक अतिक्रमण का साजिश तो नहीं है!

  6. Pingback: भाजपा झारखंड इकाई के बैनरों एवं पोस्टरों में रघुबर दास का घटता कद!

  7. Pingback: झारखंड भाजपा ने स्पष्ट कर दिया कि उनका अगला मुख्यमंत्री भी गैरादिवासी !

  8. Pingback: झारखंड भाजपा ने स्पष्ट कर दिया कि उनका अगला मुख्यमंत्री भी गैर आदिवासी !

  9. Pingback: आखिर क्या वजह है कि मुख्यमंत्री को "चु**या" जैसे अपशब्द का सहारा लेना पड़ा

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.