सोशल-मीडिया

सोशल-मीडिया पर मुख्यमंत्री को आलोचनाओं और गालियों से नवाजती झारखंडी युवा

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एक वो समय था जब भाजपा पोस्टरबाजी, झूठे विकास के दावों-वादों, और सोशल-मीडिया में अपने जुमलों और भड़काऊ पोस्ट के दम पर देश की जनता खासकर युवाओं को भ्रमित कर, झारखंड की सत्ता पर काबिज हुई थी। लेकिन जैसे-जैसे झारखंड की जनता को इसका एहसास होने लगा कि रघुबर दास के रूप में उन्हें केवल एक फोटोकॉपी वाला मुख्यमंत्री मिला है तो उनके विकास का बुखार भी वैसे-वैसे उतरने लगा। इनके तुगलकी शाषण में जनता को विकास के नाम पर अबतक केवल ढपोरशंखी वादों का सिरके के सिवा कुछ और प्राप्त न हो सका है। यह सरकार जनता को उनके मूल समस्याओं से भ्रमित कर सोशल-मीडिया पर अपने ढकोसले उपलब्धियों के कई झंडे गाड़ी हैं। लेकिन सचाई ठीक इसके उलट है, सी.एन.टी/एस.पी.टी. एक्ट हो या मोमेंटम झारखण्ड, लैंड बैंक के नाम पर आदिवासी-मूलवासियों की ज़मीनों की जमीनों लूट हो या फिर घटिया स्थानीय नीति के मदद से 75% बाहरियों की नियुक्ति, रघुबर दास के ढपोरशंखी उपलब्धियों का काला चिटठा खोल चुकी है। शायद यही वजह है कि केवल सोशल-मीडिया पर हवाई किला बनाने वाले मुख्यमंत्री महोदय को झारखंड के युवा वर्ग आलोचनाओं और गालियों से सम्मानित कर अपना भड़ास निकाल रहे हैं।

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एक ओर जहाँ झामुमो की संघर्ष यात्रा की सफलता की गूँज सोशल-मीडिया पर धूम मचा रही है तो वही झारखंडी युवा अपशब्द की मालाओं से मुख्यमंत्री जी को नवाज रही है। हेमंत जी के मुहिम की सराहना जहाँ झारखंडी युवा अपने कमेंट्स, लाइक्स, और रीट्वीट्स के माध्यम से लगातार देते हुए पार्टी से जुड़कर अपना समर्थन जाहिर कर रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली और रघुबर दास के तानाशाही रवैय्ये से से तंग आकर सभी इन्हें कोस रहे हैं, कोई इन्हें चुनने का अफ़सोस जाहिर कर रहा है, तो कोई 2019 चुनाव में उखाड़ फेकने की धमकी दे रहा है। जिस मुख्यमंत्री को यहाँ की युवा ने उनके जुमलों के प्रपंच से भ्रमित हो सोशल-मीडिया के अर्श पर बिठाया था, वही झारखंडी युवा वर्ग उसी सोशल-मीडिया पर इनके कारिस्तानियों का काला चिटठा खोल इन्हें वापस फर्श पटक दिया हैं।

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