कांके विधानसभा सीट से फेक प्रत्याशी लड़ाने की जुगत में भाजपा

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कांके विधानसभा प्रत्याशी

भाजपा का फेक प्रत्याशी कांके विधानसभा सीट से

क्या भाजपा के लिए राजनीतिक सत्ता ही सबकुछ हो चला है? क्या भाजपा सत्ता तक पहुंचने या सत्ता पर बने रहने के लिए हर प्रकार के तिकड़मों को मंत्र के रूप में प्रयोग करेगी? क्या यह इतनी ताक़तवर हो चली है कि अपनी जीत के अनुकूल समूची कवायद रचने से भी नहीं चुकेगी? जो सच लगे मान लीजिए, क्योंकि अब तक इनके चुनाव जीतने के तरीके अपराध, भ्रष्टाचार और काला धन के नैक्सस से जुड़ाव के रास्ते माना जा रहा था, अंगुली उठाती रही है, लेकिन झारखंड में अब इन्होंने चुनाव जीतने के लिए आरक्षित सीटों पर मिलने वाले अधिकार पर ही धावा बोल दिया है। 

झारखंड में आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए यह जरूरी होता है कि प्रत्याशी या उसका परिवार 1951 से झारखंड का मूल निवासी हो। लेकिन भाजपा लगातार दूसरे राज्य के प्रत्याशी को उस क्षेत्र से लड़ाने से नहीं चुक रही। गिरिडीह नगर निगम के लिए दूसरे राज्य के प्रत्याशी को चुनाव लड़वायी, उच्च न्यायालय से उनके खिलाफ फैसला आने के बावजूद वह शान से उस पद पर डटे हुए हैं। क्योंकि राज्य में सत्ता उनकी है और इस राज्य में सत्ता का मतलब संविधान या उससे भी बड़ा होना है। यही अब कांके विधानसभा सीट पर भी देखा जा सकता है ।

क्या है कांके विधानसभा का मामला

विधानसभा चुनाव में कांके हेठ कोनकी, पिठौरिया निवासी दिनेश रजक ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली, मुख्य निर्वाचन आयुक्त झारखण्ड, राँची, जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त को राज्य की अधिसूचना का हवाला देते हुए, पत्र लिख कर गुहार लगाई है कि कांके विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां चुनाव लड़ने का अधिकार केवल झारखण्ड के मूल निवासी, के अनुसूचित जाति उम्मीदवार को है, न कि किसी बाहरी राज्य के प्रत्याशी को।

ज्ञात हो कि समरी लाल राजस्थान के मूल निवासी है फिर भी भाजपा ने उसे इस क्षेत्र से  प्रत्यासी बनाया, नामांकन भी दाखिल कर रहे हैं, जो कि बिल्कुल गैर-कानूनी है। दिनेश रजक ने अपने आवेदन में उच्च न्यायालय के फैसलों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया है कि कांके क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। दूसरे राज्य के मूल निवासी इस प्रदेश में आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते हैं। मसलन, इसके बावजूद भी अगर समरी लाल का नामांकन होता है तो फिर बीजेपी को बिना चुनाव करवाए ही सत्ता में काबिज हो जाना चाहिए। 

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