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झारखंड पुकारा रघुवर नाकारा

झारखंड पुकारा रघुवर नाकारा : युवा 

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झारखंड पुकारा रघुवर नाकारा” झारखंडी युवाओं का नया नारा

मौजूदा वक़्त में झारखंड की राजनीति में भाजपा के लिए अंधेरा घना है। इस घने अंधेरे तले भाजपा फिर से एक बार सत्ता तक पहुँचने के लिए सीढ़ियां ढूंढती नजर आ रही है, कई जतन करते देखी जा सकती है। यह अंधेरा उन्हीं की सत्ता का फैलाया हुआ है जिसने राज्य के उस सत्य को उभार दिया है, जिसमें झारखंड ना चाह कर भी अलग झारखंड से पहले वाली उसी परिस्थिति में जा खड़ा हुआ है, जहाँ न्याय, समानता और अधिकार शब्द ग़ायब थे। 

उसी अंधेरे सियासत तले झारखंडी युवा व जनता लोकतंत्र के उजियारे को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इस क्रम में इन्होंने भाजपा के हर हथकंडे को नकारते हुए भाजपा के लिए सत्ता की राह मुश्किल बना दी है। आज झारखंडी जनता साज़िश के दलदल में फंस चुके झारखंड को निकालने के लिए सत्ता के हर पैंतरों को नाकाम करती दिखती है। यहाँ की जनता समझ चुकी है कि झारखंड के जख्मों से यह मवाद अभी नहीं निकालेंगे तो फिर देर हो जायेगी।

आइये इसे परखते हैं, पहले रघुवर सरकार ने नारा दिया कि “अबकी बार 65 पार”, सभी इस नारे से परिचित होंगे। उनके इस नारे की हवा झारखंडी युवाओं व जनता सोशल मीडिया व मेनस्ट्रीम मीडिया पर “अबकी बार ठगुवर पार” कह कर निकाल दी। जिसके कई वायरल वीडियो इसके गवाही देती है।

जब इससे बात नहीं बनी तो खुद राज्य के मुखिया ने जन आशीर्वाद यात्रा निकाला और नारा दिया कि “डबल इंजन डबल विकास”। हालांकि इस यात्रा में झारखंडी जनता, युवा व महिलाओं ने सीधे-सीधे निशाना साधते हुए नजर आए। अबकी बार जनता ने उनके नारे को “डबल इंजन डबल विनाश” कह कर नकार दिया।

जनता का झारखंड पुकारा रघुवर नाकारा करारा जवाब है सत्ता के नारे का

फिर बीच कार्यक्रम में ही दौर आया “घर-घर रघुवर” नारे का, जिसके जवाब में जनता ने कहा “घर-घर लूटा रघुवर”। उनका यह पैंतरा भी जब विफल रहा तो भाजपा के सुनियोजित पहचान रखने वाली आईटी सेल ने नया नारा गढ़ा – “झारखंड पुकारा रघुवर दुबारा”। इस बार भी झारखंडी युवा अपने हथेली में थामे फ़ोन से उसी प्लेटफोर्म से जवाब दिया “झारखंड पुकारा रघुवर नाकारा”। 

मसलन, खाक भी जिस जमीन का पारस है उस ज़मीन ने रघुवर सरकार की सियासत को पूरी तरह न केवल नकार दिया है बल्कि दो-दो हाथ करने को अड़ी है।

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