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मोदीजी के पहली ही सभा में लगे रघुवर हाय-हाय के नारे!

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मोदीजी के पहली सभा में रघुवर हाय-हाय के नारा लगना बीजेपी के सुशासन की कलई खोलती है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदीजी के झारखंड के पहले सभा में ही, झारखंडी जनता के रघुवर हाय-हाय के नारे ने झारखंड में उनकी सुशासन प्रशासन की कलई खोल दी। प्रधानमंत्री जी का कहना कि झारखंड 19 वर्ष की आयु में अपने युवा अवस्था में हैं, ऐसे वक़्त में इसका ख़याल रखने की आवश्यकता है। इसलिए रघुवर सरकार के हाथों में राज्य का सत्ता फिर से देने की जरूरत है।

ऐसे में झारखंडी युवाओं के जहन में यह सवाल ज़रुर होगा कि रघुवर दास का युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर युवा झारखंड को सवारने की मोदीजी की यह कैसी कावाद है। झारखंड में पहली बार देखा जा सकता है कि युवा अवस्था में युवाओं को बिगड़ने क ख़तरा होता है, जबकि ठीक इसके उलट झारखंड के भाजपा के अभिभावक ही पूरे कार्यकाल भर बिगडी दिखी।

झारखंड का सच भी तो यही हो चला है कि मौजूदा अभिभावक विद्यालय से अधिक तरजीह यदि शराब बिक्री को देती हो। अपने घर के बच्चों को दरकिनार कर यहाँ के रोज़गार बाहरियों को लूटा देती हो। यदि अपनी जनता की ज़मीन सत्ता लोभ में पूँजीपतियों को लूटा दे और पूंजीपति कहे कि ज़मीन नहीं दोगे तो उसी ज़मीन में गाड़ देंगे, तो अभिवाक को बिगडैल कहना क्या कोई अतिशयोक्ति होगी? 

मसलन, 19 वर्षों में लगभग 15 वर्ष सरकार चलाते हुए लूट की इबारत लिखने के बाद, मोदीजी यदि कहते हैं कि पिछली सरकार की नजर यहाँ के धरती में छुपे संसाधनों पर है, तो यह अपने आप में हास्यप्रद है। यदि सत्ता लूट के सियासी रास्ते बनाने में ही पांच बरस गुजार दे, तो जनता का रघुवर हाय-हाय का नारा लगाना नाजायज़ तो कतई नहीं हो सकता। बल्कि निराशा और आशा के बीच उस कील को ठोंकने की शुरुआत भर जरूर हो सकता है। 

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