आर्थिक संकट घोर फिर भी सब चंगा है

सब चंगा है के नारे से आप किसी भ्रम में न रहे

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साहेब का अमेरिका जाकर ‘सब चंगा है’ का नारा लगा आना, बैंकिंग प्रणाली को लेकर वित्त मंत्री का कहना कि चिंता की कोई बात नहीं, वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री का कहना कि सिनेमा हाउसफ़ुल का मतलब, आर्थिक मंदी नहीं! के बावजूद सच्चाई का झूठ के परदे से बाहर निकल आना आगाह करता है कि आप भ्रम न पालें…

सत्ताधारी गिरोह में घबराहट है, आर्थिक संकट की पूरी मार से जनता कराहेगी, सिंहासन हिलेगा, तब इनका बरगलाना बेअसर साबित होगा, इसलिए ध्यान बँटाने भर के लिए कई प्रयोग हो रहे हैं। आनन-फ़ानन में राम मन्दिर पर फ़ैसला। इन दिनों न्यायपालिका जैसे पेश आई है, कोई आश्चर्य होना नहीं चाहिए कि क्यों यह कवायद झारखंड चुनाव से पहले हुई।

वाह सब चंगा है !

देश भर में औद्योगिक उत्पादन का कई महीनों से ठप होना, लाखों रोज़गार छिन जाना। मैन्युफ़ैक्चरिंग और बिजली उत्पादन में क्रमश: 1.2% और 0.9% की कमी आयी, पिछले सात वर्षों में बढ़ने के बजाय घट जाना, आर्थिक मंदी के गहराने का संकेत भर है। कई बड़े बैंक डूब गए तो क्या हो सकता है, इस संकट की झलक भर पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक है। रिज़र्व बैंक के पास गाढ़े वक़्त के लिए सुरक्षित रखे फ़ण्ड जिसकी ज़रूरत 1947 से नहीं पड़ी, सरकार द्वारा निकाला जाना तस्दीक करती हैं।

सब चंगा है कैसे?

भाषणों में ग़रीबी, लेकिन कर्मों में क्रोनि कैपिटलिज्म के क्रम में सरकारी संस्थानों को खोखला कर बेचने की तैयारी, बीएसएनएल और एमटीएनएल के डेढ़ लाख से अधिक कर्मचारियों को बाहर करने का सुझाव वित्त मंत्रालय तक द्वारा दिया जाना। ओएनजीसी व एचएएल जैसे विशालकाय, लगातार मुनाफ़े देने वाली सरकारी उपक्रमों की हालत यह होना, ओएनजीसी हज़ारों करोड़ के कर्ज़ तले दबा है तो एचएएल को वेतन देने के लिए कर्ज़ लेना पड़ रहा है। देर-सबेर इनकी बिक्री का नम्बर भी आयेगा।

सरकार का रेलवे को निजीकरण की पटरी पर बुलेट ट्रेन की रफ़्तार से दौड़ाना। रेल की पटरियों, स्टेशनों, स्टाफ़ का इस्तेमाल करके पहली निजी ट्रेन ‘तेजस’ को पटरी पर दौड़ना, 150 ट्रेनों और 50 स्टेशनों का भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर लेना। एजेंडा सरकार का साफ़ है कि देश भर में देशी-विदेशी बड़ी पूँजी का बेरोकटोक राज। यह दौर जनता के बुनियादी अधिकारों की कीमत पर देश के शोषक वर्गों को सुरक्षित करने इन्तज़ाम करना भर है। अगर यह सब तेजी से घट रहा है, फिर भी सब चंगा है कैसे?

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