कल्पना सोरेन -झारखंडियत को परिभाषित करती एक अलग व्यक्तित्व

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कल्पना सोरेन, हेमंत सोरेन अपने परिवार के संग

कल्पना सोरेन : जिंदगी के संघर्ष, जो अंधेरे में गूंजता महिलाओं की वह आवाज़ जिसे छोटे बच्चे लोरी मान जब सो जाते हैं, माँ आश्वस्त हो अंधेरे में ही जंगल में  निकलती हैं। गोंद, महुआ, सखुआ दातुन, मीठा जड़, पत्ते व लकड़ी की छालों को बटोर रात के आखिरी पहर बीतने से पहले ही अपने झोपड़ी में पहुंच जाती हैं। दर्द के जिस गीत को लोरी मान कर सोये बच्चे जब पौ फटते ही जागते हैं, तो रात भर अगले दिन के भोजन का जुगाड़ कर लौटी आदिवासी महिलायें बच्चों को चावल-माड़ या चावल-इमली का झोर खिलाती है।

बूढ़े मां-बाप भी कमोवेश यही कुछ खाते हैं। फिर यह महिलायें सूरज चढ़ने से पहले ही जंगल से बटोरे सामान को टोकरी में बांधकर बाजार जा बदले में चावल लेकर घर पहुंच जाती हैं। यही जीवन था और अब भी है झारखंड के आदिवासी महिलाओं की। इन्हीं संघर्षों के बीच जन्मी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अर्धांग्नी श्रीमती सोरेन, जिसका दर्द आज भी नेता प्रतिपक्ष के हमसफ़र होने के बावजूद, उनके सादगी भरे रहन-सहन, अपने संस्कृति से उनके जुडाव में झलकता है। 

कल्पना सोरेन
कल्पना सोरेन, हेमंत सोरेन व उनकी बहन
कल्पना सोरेन
कल्पना सोरेन के पति हेमंत सोरेन व ससुर शिबू सोरेन

जब मौजूदा दौर में महिला के लिए व्यक्तित्व के मायने है, सुनहरे बाल, नीली आँखें, पतली आकृति या, 6 फीट लंबाई तो ऐसे दौर में श्रीमती सोरेन के लिए व्यक्तित्व के अलग मायने हैं -जैसे अपने वृद्ध ससुर, हमारे दिशोम गुरु की सेवा करना, आदिवासी समाज के बच्चे-महिलाओं को उनके बेहतरी के लिए वक़्त देना, मुफ्त ग़रीब बच्चों के लिए स्कूल चलाना, अपने सांस्कृतिक ताने-बाने से खुद को बांधे रखना, ग़रीब आदिवासी महिलाओं व बच्चों को मासूमियत भरी मुस्कान से यह ढाढ़स बंधाना कि वे समाज में बेसहारा नहीं हैं। या फिर संस्कृति पर्व कर्मा, सरहुल, सोहराय में प्रकृतिक व पशुओं का पूजन कर पारंपरा निभाना। 

कल्पना सोरेन का संस्कृति से जुडाव

कल्पना सोरेन
संस्कृति व कल्पना सोरेन

आप उन परिभाषाओं को कैसे मापेंगे? जब कल्पना जी जैसी महिलाएँ आज भी अपने मेहमानों को अपने हाथों से पारंपरिक तरीके से खाना बनाकर खिलाना केवल पसंद ही नहीं करती, खिलाती भी हैं। इसके उदाहरण सत्ता के रसूकों व चकाचौंध भरी दुनिया को कई दफा देखने को मिला। अपने छोटे ससुर अंतिम क्रिया क्रम के अवसर पर पारंपरिक चूल्हे पर खाना बना कर खिलाने के सार्वजनिक तस्वीर से उनके व्यक्तित्व की जानकारी हमतक पहुँच पायी।

कल्पना सोरेन
कल्पना सोरेन हेमंत सोरेन की प्रेरणा
कल्पना सोरेन
कल्पना सोरेन अपने परिवार संग

जाहिर है सत्ता के करीब रहने वाले अन्य महिलाओं की तरह यह भी हैं, लेकिन इनको यह चकाचौंध छू भर भी पाई है। बल्कि ये तो हेमंत सोरेन की वह प्रेरणा है, जिनके अक्स तले हमारी राज्य के बेटियों को मुफ्त तकनीकी शिक्षा व 50% आरक्षण मुहैया हुई। और वर्तमान में भी झामुमो के घोषणा पत्र में न मिटने वाली अक्षर के तरह अंकित है।

बहरहाल, अन्य महिलाओं की भांति सुरक्षित समाज में सुकून का सपना पाली झारखंड के इस बेटी के लिए, निस्संदेह व्यक्तित्व को परिभाषित करने का एक अलग व्यक्तिगत यात्रा है, जो झारखंडियत के भावनाओं से हमारी परिचय करवाता है।

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