एबीपी के कार्यक्रम में हेमंत सोरेन ने गोदी मीडिया की उड़ाई धज्जियाँ  

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एबीपी

झारखण्ड के हुक़्मरान यह यक़ीन दिलाना चाहते हैं कि राज्य में सब कुछ ठीक है, चारों ओर अमन-चैन व ख़ुशहाली है। हुक्मरान चाहते हैं कि उनके विचारों का घटाटोप पूरे समाज में इस क़दर छा जाये कि उसके विरोध में कोई चूँ तक न करे। एक तरफ तो ये फ़ासीवादी राज्य को मौत की घाटी में तब्दील कर रहे हैं, वहीँ गोदी मीडिया दुरभिसन्धियों (conspiracy) पर देशभक्ति का पर्दा डालकर जनता को यक़ीन दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं, जैसे राज्य तरक़्क़ी का पर्वत लाँघ रहा है। ऐसा ही कुछ आज सुबह, झारखंड के राजधानी रांची में हिंदुस्तान व एबीपी न्यूज़ के प्रायोजित कार्यक्रम में देखने को मिला, जिसमे नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के साथ ही देश एवं प्रदेश के सम्मानित नेतागण आमंत्रित थे

कार्यक्रम में न झारखंडी आवाम के दुर्दशा पर सवाल थे, न बेरोज़गार युवाओं के आत्महत्या पर सवाल थे, न लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल थे,  यहाँ तक कि उनके तर्कश सरकार के योजनाओं को कुतरने वाले चूहों पर ही सवाल थे और न ही सरकार के जनविरोधी नीतियों के साथ-साथ मंदी के वजह से बंद हो रहे उद्योगों पर कोई सवाल थे। दिलचस्प पहलू यह था कि रघुबर दास को सफलतम मुख्यमंत्री की उपाधि देते हुए राज्य के दूसरी बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा को केवल आदिवासियों की पार्टी घोषित करने का प्रयास तक किया गया। हद तो यह थी कि झारखंड के क़ानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री जी के बजाय हेमंत सोरेन से सवाल पूछा जा रहा था। 

बहरहाल, ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो एबीपी न्यूज़ कोई सरकारी ख़ुफ़िया एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही हो कि विपक्ष में गठबंधन संभव है या नहीं। लेकिन हेमंत सोरेन के सधे हाज़िर जवाब पर उपस्थित जनता कि तालियों के गड़गड़ाहट ने यह साबित तो जरूर कर दिया कि जनता इनके मंसूबों को भाप चुकी है। कार्यक्रम में श्री सोरेन ने जनता को अवगत कराते हुए कहा कि प्रधान मंत्री जी जनता को पेंशन तो 60 वर्ष बाद देंगे, लेकिन बंदरगाह का उदघाटन कर यहाँ सम्पदा तो उसी दिन ले गए। क्या यह जनता को भ्रम में डालना नहीं है।   

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