गिरिडीह समेत झारखण्ड की रैयतों की भूमि पर रघुवर सरकार का डाका 

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गिरिडीह

गिरिडीह समेत झारखण्ड की रैयतों सावधान 

इसमें कोई संदेह नहीं कि फासीवादियों की घिनौनी करतूतों व उनके पूँजीपरस्त धनलोलुप चरित्र का पर्दाफ़ाश व्यापक पैमाने पर होने लगा है। ये लोगों से उनको मिले हक़ एक-एक करके छीनते हुए करोड़ों लोगों को उनकी ज़मीन से उजाड़ रहे हैं, केवल चंद पूँजीपतियों के फ़ायदे के लिए इन फासीवादियों के सामाजिक आधार को छिन्न-भिन्न अब झारखंडियों को करना ही होगा। अगर हम अब भी एकजुट हो इन्हें इतिहास के कूड़ेदान में नहीं फेंका तो इस राज्य के मालिकों को भिखारी बनने से कोई नहीं बचा सकता, क्योंकि वे लगातार इन कामों में जुटे हुए हैं।

गिरिडीह जिले में सरकार द्वारा प्रतिबंधित जमीनों की जो सूची तैयार की गयी है, उसमें लाखों ऐसे रैयतों की गैरमजरूआ खास भूमि डाली जा चुकी है, जो वर्षों से रैयत के दखल में है और जमाबंदी कायम है सरकार के कार्यालय की आंकड़ों को माने तो, प्रतिबंधित सूची डाली गयी प्लॉटों की संख्या 70 हजार से अधिक है, जिससे सात लाख से भी अधिक रैयत प्रभावित होने वाले हैं साथ ही तानाशाही तरीके से उन प्लॉटों की जमीन की रजिस्ट्री, म्युटेशन व एलपीसी निर्गत आदि पर भी रोक लगा दिया गया है। यही नहीं अब रैयत उन प्रतिबंधित सूची में डाली गयी ज़मीनों का ख़रीद-बिक्री नहीं कर सकते 

गिरिडीह अंचल से कुल 15,658 प्लॉट प्रतिबंधित सूची में डाली गयी है, जिसमे गांडेय अंचल – 5,249, बिरनी अंचल – 12,046, पीरटांड अंचल – 5,379, डुमरी अंचल – 3,697, बेंगाबाद अंचल – 11,840, जमुआ अंचल – 3,674, धनवार अंचल – 730, गावां अंचल – 3,621, तिसरी अंचल – 630, देवरी अंचल – 4,323, बगोदर अंचल – 137 और सरिया अंचल – 2,999 प्लॉटों को प्रतिबंधित सूची में डाला गया है इस प्रतिबंधित सूची में गिरिडीह अंचल के प्लॉटों की संख्या अधिक है सरकार के नये निर्देश के बाद राजस्व विभाग ने बिना जांच-पड़ताल के ही इन सभी जमीनों को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया 

मसलन, सरकार ने इस कदम से लाखों रैयत जिनकी रोजी-रोटी उन ज़मीनों पर है व आलीशान भवन-अपार्टमेंट का निर्माण कराया है, उनका भविष्य अधर में लटका दिया है दिलचस्प पहलू यह है कि इस शहर का तक़रीबन आधा हिस्सा गैर मजरूआ खास जमीन पर बसा है, जो आज़ादी के पहले से न सिर्फ दखलकार हैं, बल्कि लंबे अर्से से इन्हें राजस्व रसीद भी हासिल है। ऐसे में यदि यह ज़मीने सरकारी थी तो फिर वर्षों से इन ज़मीनों का लगान कैसे और क्यों वसूली गयी ऐसे मे पहले से ही  मंदी की मार झेल रही जनता से उनका एकमात्र आय का ज़रिया छीन लिए जाने के कदम ने उनके जीवन यापन पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए हैं। जबकि भयावह सत्य यह है कि यह हाल केवल गिरिडीह जिले का नहीं बल्कि तमाम झारखण्ड के जिलों का है।   

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