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हेमंत सोरेन ने ओबीसी को उनका हक़ 27% आरक्षण देने के लिए कसी कमर

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हेमंत सोरेन ने कहा कि वे ओबीसी के 27% आरक्षण को लेकर गंभीर

झारखंड में ओबीसी की आबादी सामाजिक, आर्थिक, जातीय जनगणना-2011 के अनुसार  तकरीबन 1.33 करोड़ हैं, जोकि राज्य की कुल आबादी का 40.43 फीसदी है गिरिडीह जिले में ओबीसी की सर्वाधिक संख्या, लगभग 15.42 लाख है जबकि जनसंख्या के आधार पर धनबाद में 11.54 लाख -दूसरा व राँची 10.54 लाख आबादी के साथ तीसरे नंबर पर हैइसके बाद क्रमशः देवघर, पलामू, सरायकेला तथा चतरा जिले आते हैं इन्हीं के दम पर भाजपा आज सरकार में है, लेकिन इस आबादी को आजतक इन्होंने कभी इनका हक़ 27 प्रतिशत आरक्षण मुहैया नहीं करवाई

हालांकि, मानसून सत्र के दौरान सदन में झामुमो के विधायकों ने इसका पुरजोर विरोध किया। हेमंत सोरेन ने स्वयं सरकारी शिक्षकों की हुई नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप लगाये और ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण की मांग करते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने युवा आक्रोश मार्च के मंच से भी कहा -यह सारा खेल इस तानाशाही सरकार द्वारा बनायी गयी स्थानीय नीति का है। ताकि इस राज्य के युवाओं की नौकरी अन्य राज्य, विशेषकर छत्तीसगढ़ और गुजरात के लोगों में आसानी से बांटी जा सके।

हेमंत सोरेन ने कहा कि उनका मानना है कि राज्य के दलित, आदिवासी-मूलवासी व ओबीसी को जो अधिकार मिलने चाहिए थे, वह रघुवर सरकार ने कभी नहीं दिए। उनका यह भी मानना है कि यह सरकार जात-पात, अगड़ा-पिछड़ा के नाम पर केवल राजनीतिक रोटियाँ सेक रही है। लेकिन वे और उनका दल झामुमो सरकार इस मंशा को कभी झारखंड में पूरा नहीं होने देंगे। उनका दोटुक कहना है कि उनकी सरकार आते ही वे सबसे पहली प्राथमिकता स्थानीय नीति को परिभाषित करना होगा और राज्य के ओबीसी समुदाय को उनका हक़ 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का रहेगा। स्थानीय युवाओं को सरकारी और प्राइवेट दोनों नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करेंगे।   

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