बेरोज़गार होने डर से झारखंडी युवा ने आत्म्हात्या की

बेरोज़गार होने की आशंका में भाजपा नेता के बेटे ने की आत्महत्या 

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सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2014 से लेकर अब तक देश में 20 साल से लेकर 30-35 साल तक के लगभग 27 हज़ार से अधिक बेरोज़गार युवाओं ने आत्महत्या कर ली। साथ ही लगभग 28 से 30 करोड़ बेरोज़गार युवा में सड़को की धूल फाँक रहे हैं, ऱोज ब ऱोज इस संख्या में वृद्धि भी हो रही है। व्यवस्था नौजवानों को जीने नहीं दे रही है जिसके वजह से ये युवा डिप्रेशन के शिकार होते जा रहे हैं। ये युवा अपनी पूरी जवानी एक रोज़गार पाने की तैयारी में निकाल देते हैं, फिर भी इन्हें रोज़गार नहीं मिल पाता। ऐसे में छात्र-नौजवान इस असुरक्षा को ना झेल पाने के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। झारखण्ड में यही बेरोज़गारी भस्मासुर बन भाजपा नेताओं के घर जला रही है।

जमशेदपुर की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, प्रगति नगर के भाजपा नेता जो बारीडीह मंडल आईटी सेल प्रभारी सह बस्ती विकास समिति के मीडिया प्रभारी भी हैं, के बेटे आशीष कुमार ने भी असुरक्षा के आलम में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर लीनेताजी ने बताया कि बेटा खड़ंगाझार में जिस कंपनी में काम करता है, वह कंपनी टाटा मोटर्स के लिए पार्टस बनती हैबेटे ने कहा था कि टाटा मोटर्स में चल रहे ब्लाक क्लोजर का असर उसकी कंपनी पर भी पड़ा है, शायद मेरी नौकरी छूट जायेगी पिछले कुछ दिनों से वह नौकरी छूट जाने की आशंका से तनाव में था। आखिरकार उसने एक दिन जिंदगी को अलविदा कह दिया घरवालों ने आवाज़ तो दी, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया

इस राज्य की सच्चाई यह है कि जो नौकरियाँ निकल भी रही हैं, वह भ्रष्टाचार, गलत स्थानीय नीति व धाँधली की शिकार हो जा रही हैं। छात्र तैयारी करते रह जा रहे हैं और नौकरी किसी पैसे वाले, किसी सिफ़ारिशी के बेटे-बेटियों व अन्य राज्य के लोगों को मिलती जा रही है। परीक्षा हो जाने के बाद भी रिजल्ट नहीं निकाला जा रहा है, ज्वाइनिंग नहीं हो रहा है या फिर पूरी भर्ती प्रक्रिया को कोर्ट में धकेल दिया जा रहा है। मसलन, रघुबर सरकार न केवल रोज़गार पैदा करने के मामले में ही फ़ेल हैं, बल्कि लाखों की संख्या में ख़ाली पदों को भरने में भी नाकामयाब साबित हुई है।

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