जनसंवाद

जनसंवाद में शिकायत करने के बावजूद लुप्त जनजातियों के गाँव में बिजली नहीं पहुंची 

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद लुप्त जनजातियों के घरों में नहीं पहुंची बिजली

रघुबर सरकार के बिजली को लेकर किये गए वायदे और आदिवासियों के प्रति प्रेम की कलई लोहरदगा जिले में खुलती नजर आयी है।  इस जिले के लुप्त प्राय जनजाति परिवार बिजली के नाम पर खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। पेशरार प्रखंड के हेसाग पंचायत अंतर्गत पड़ने वाली लुप्त प्राय जनजातियों के गांवों (हतवल, कुंबाटोली, खंबानटोली और बांड़ी) में बिजली के खंभे तो महीनों पहले गाड़ दिए गए हैं। तारों के साथ-साथ मीटर तक लगा दिए गए हैं। मगर इन तारों में अब तक करंट प्रवाहित नहीं की गयी है। 

हेसाग कुंबाटोली की सीता देवी कहती है कि यहाँ के घरों में केवल देखने व् दिखाने के लिए बिजली के मीटर और तार लगाई गयी है। हम गांव वाले तो अब भी ढिबरी युग में ही जी रहे हैं। इनका यह भी कहना है कि यहाँ अब तक ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया है लेकिन दिखावे के लिए मीटर जरूर लगा दिया गया है, ऐसे में बताइये मीटर लगाने का क्या तुक बनता है। बांड़ी में रहने वाले सभी साठ परिवार लुप्त प्राय जनजाति के हैं। सबके घर का यही हाल है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उनलोगों ने बिजली की इस समस्या को जिला प्रशासन द्वारा लगाया गया जनता दरबार में उठाया था, लेकिन तमाम अधिकारीगण टालमटोल कर चलते बने।

मुख्यमंत्री जनसंवाद जिसपर रघुबर सरकार खूब इतराती है, के टोल फ्री नंबर पर भी दो बार शिकायत दर्ज कराई जा चुकी हैं। फिर भी कहानी वही ढाक के तीन पात। जबकि सरकार व् उनके विभाग का दावा है कि पेशरार प्रखंड के तमाम गांवों में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। कागज पर पुष्टि की जा चुकी है इस प्रखंड के तमाम गांवों के हर घर को उज्वला  योजना के अंतर्गत आच्छादित कर दिया गया है। लेकिन हकीकत तो यह है कि अब भी यहाँ के सैकड़ों घर अंधेरे में हैं। लोहरदगा बिजली विभाग से ट्रांसमिशन की व्यवस्था संभलने में विफल दिख रही है, आए दिन तकनीकी ख़राबी से यहाँ के उपभोक्ता जिस प्रकार परेशान हैं। लगता नहीं कि वे सुदूरवर्ती जंगल पहाड़ों के बीच रहने वाले घरों में बिजली की रोशनी पहुंचाने में सफल होंगे।

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related Posts