आदिवासी दर्शन की जरुरत आज समाज को क्यों?

आदिवासी दर्शन

आदिवासी दर्शन की समाज में अहमियत कैसे बांची प्राण… है? यह सवाल आदिवासी समुदाय का देश से है,  विकास की जिस धारा को शहर से गांव पहुंचाने की बात सरकार से लेकर पंचायत तक के नेता करते रहे, उसके अक्स तले आदिवासी केवल अपनी झोपड़ी को बचाने में ही असली सुकून मानते हैं। मुश्किल तो … Read more

जनसंवाद में शिकायत करने के बावजूद लुप्त जनजातियों के गाँव में बिजली नहीं पहुंची 

जनसंवाद

मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद लुप्त जनजातियों के घरों में नहीं पहुंची बिजली रघुबर सरकार के बिजली को लेकर किये गए वायदे और आदिवासियों के प्रति प्रेम की कलई लोहरदगा जिले में खुलती नजर आयी है।  इस जिले के लुप्त प्राय जनजाति परिवार बिजली के नाम पर खुद को ठगा महसूस कर … Read more

सम्मान राशि सामाजिक अगुवाओं के लिए सम्मान या अपमान!

सम्मान राशि

सम्मान राशि के नाम पर सामाजिक अगुवाओं का अपमान! शिबू सोरेन के नेतृत्व एवं लड़ाका झारखंडियों के संघर्ष और बलिदान के बदौलत वर्ष 2000 में झारखंड राज्य भारत के मानचित्र का एक अभिन्न अंग बना अलग झारखंड राज्य के आन्दोलन में आदिवासियों के बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की मुख्य वजह जल, जंगल और जमीन की रक्षा थी … Read more

मानदेय के नाम पर आदिवासियों को आपस में लड़ाने की साजिश

मानदेय के नाम आदिवासियों को आपस में लड़ाने का प्रयास

मानदेय के नाम पर सरकार भ्रम फैलाने की स्थिति में  प्रागेतिहासिक काल में मनुष्य जब घूमते हुए थक गए होंगे तब उन्हें ख़याल आया होगा बसेरा बना कहीं एक ही जगह थम जाया जाए। उस स्थान पर घर बनाये होंगे, सुरक्षा एवं आपसी कलह के अनुभवों से नियम बनाये होंगे। बाद में खान-पान, बेटी-रोटी एवं … Read more

अलग झारखण्ड में वन अधिकार अधिनियम की ज़मीनी हकीकत

वन अधिनियम 2006

वन अधिकार अधिनियम की ज़मीनी हकीकत किसी कवि ने अपने शब्दों में कितना सुंदर झारखण्ड का चित्र उकेरा है। सम्पूर्ण छोटा नागपुर एक लम्बा लहरदार-घुमावदार पहाड़ की तरह है…, इसके केंद्र में पठार है…, यह पूरा इलाका कमोवेश घने जंगलों से पटा है…, जब निचले और लहरदार ढलान में असंख्य पेड़ बढ़ते हैं तो इलाकों … Read more

विस्थापन झारखंडी आदिवासी-मूलवासी का पर्याय !

झारखंडी आदिवासी-मूलवासी का विस्थापन

दशक, 1990 के आरम्भ से झारखण्ड राज्य (2001 के पूर्व बिहार) के नीतिगत ढाँचे में आये नवउदारवादी बदलाव के बाद से राज्य में प्रायोजित हिंसा बढ़ने से देश की अधिकांश आदिवासी-मूलवासी आबादी भीषण ग़रीबी के प्रभाव में रसातलिय जीवन जीने को अभिशप्त हैं। आदिवासियों-मूलवासियों की जल, जंगल, जमीन, नदियों, चरागाह, गाँव के तालाब और साझा … Read more