सम्मान राशि सामाजिक अगुवाओं के लिए सम्मान या अपमान!

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सम्मान राशि

सम्मान राशि के नाम पर सामाजिक अगुवाओं का अपमान!

शिबू सोरेन के नेतृत्व एवं लड़ाका झारखंडियों के संघर्ष और बलिदान के बदौलत वर्ष 2000 में झारखंड राज्य भारत के मानचित्र का एक अभिन्न अंग बना अलग झारखंड राज्य के आन्दोलन में आदिवासियों के बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की मुख्य वजह जल, जंगल और जमीन की रक्षा थी साथ ही उनकी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मान्यता मिल सके परन्तु अलग झारखंड में ऐसा हो न सका

झारखंड को वनांचल कहने वाली भाजपा, झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 को पारित किया और इसे पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में जबरन थोंप दिया इसी के साथ एक झटके में हजारों सालों से गाँव में चली आ रही व्यवस्था दो भागों में विभक्त हो गयी। एक तो पंचायती राज संस्थायें जो सरकारी सत्ता और दूसरी पारंपरिक व्यवस्था जैसे मुंडा, मानकी, माझी, परगना और पड़हा राजा सामाजिक समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इससे गाँव की सामाजिक एकता टूटने लगी और गाँव अलग–अलग गुटों में बंट गया। भाजपा एक तरफ तो मानदेय देकर अपना पीठ थप थपा रही है तो दूसरी तरफ पारम्परिक व्यवस्था के अगुओं के अधिकारों में कटौती कर रही है। कम्प्यूटरीकरण (डिजिटलीकरण) के नाम पर मुंडा और मानकी के मालगुजारी रसीद काटने का अधिकार छीन लिया गया। यह समझ से परे है कि सरकार सम्मान राशि देकर सामाजिक अगुवाओं का सम्मान कर रही है या अपमान! जबकि मानदेय राशि या सम्मान राशि की जगह मुंडा मानकी अपना अधिकार बचाए रखना चाहते हैं। ये बेहतर तरीके से समझ रहे हैं कि कैसे रघुबर सरकार मुंडा मानकी से बंदोबस्त करने का अधिकार को भी बड़ी चालाकी से छिनने का षडयंत्र रच रही है।

बहरहाल, सरकार की दोहरी नीति अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक तरफ यह कह रही है कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम के अंतर्गत सामाजिक अगुवाओं को सम्मान राशि का ऐलान करती है तो दूसरी तरफ यही सरकार इन दो अधिनियमों में संशोधन कर आदिवासी समुदाय की जमीन लूटने का प्रयास करती है। रघुबर सरकार पूंजीपतियों को सस्ती जमीन देने के इरादे से ग्राम सभा के सामुदायिक जमीनों को चुपके से लूटकर भूमि बैंक बनायी है। भाजपा सरकार ने भूमि बैंक बनाकर यहाँ के लोगों के पारंपरिक अधिकार का हनन कर पारंपरिक सत्ता को चुनौती दी है। परिणामस्वरूप पांच राज्यों के चुनाव परिणामों की भांति भाजपा को झारखंड में भी भारी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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