झारखंड की शिक्षा व्यवस्था

शिक्षा के क्षेत्र में मौजूदा सरकार की तुलना में हेमंत सरकार कहीं ज्यादा बेहतर 

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अगर आज झारखंड की शिक्षा व्यवस्था के अंतर्गत यहाँ के सरकारी स्कूलों की स्थिति को परखें तो हम पाते हैं कि इसे व्यवस्थित तरीक़े से ख़त्म करने का काम मौजूदा सरकार द्वारा किया जा रहा है। आज इस राज्य में सरकारी स्कूलों के हालात अच्छे नहीं हैं। वैसे तो देश भर में सरकारी स्कूलों को ख़त्म करने की योजना सरकार बनते ही शुरू हो गयी थी। लेकिन देश में पूँजीपति वर्ग की नुमाइन्दगी करने वाली सरकार के लिए इस मुहिम को आगे बढ़ाना और भी आसान हो गया। 

मौजूदा सरकार ने अब शिक्षा को भी एक बाज़ारू माल बना दिया है। सरकारी स्कूलों को सुनियोजित तरीक़े से ख़त्म कर प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा दे रही है, जिसे स्कूल शिक्षा का केन्द्र न रहकर बिज़नेस बन गया है। पूँजीपति वर्ग को अब इस क्षेत्र में मुनाफ़ा दिखने लगा है, नतीजतन वे शिक्षा के क्षेत्र में भी पूँजी लगानी शुरू कर दी है, जिससे पूरे देश में प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ आ गयी। अच्छी कमाई के मद्देनज़र स्कूलों को एक बिज़नेस के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा है। आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 तक झारखंड के सरकारी स्कूलों में होने वाले एडमिशनों में भारी गिरावट दर्ज की गयी है। जबकि निजी स्कूलों में इसी दौरान नये छात्रों के एडमिशन में उछाल देखा जा रहा है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकारी स्कूलों के ढाँचे में सुधार ना करने कारण इसकी लोकप्रियता में गिरावट देखी गयी और इस का हवाला देते हुए सरकार ने लगभग 16 हजार स्कूलों को बंद कर दिया। 

इस मामले में भी झामुमो-हेमंत सोरेन की सरकार का ग्राफ मौजूदा सरकार के तुलना में काफी मजबूत दिखता है। हेमंत सरकार में शिक्षा के बाबत काफी ठोस कदम उठाया गया था। सभी प्रकार के तकनीकी शिक्षा जैसे इंजीनयरिंग, पोलिटेक्निक, मेडिकल, नर्सिंग, बीएड आदि को न सिर्फ बढ़ावा दिया गया बल्कि महिला अधिकार के तहत लड़कियों की शिक्षा पूरी तरह मुफ्त भी कर दी गयी थी। राज्य से बाहर पढ़ रहे छात्रों के लिए स्कॉलरशिप के भी प्रावधान थे जिसे मौजूदा सरकार ने बंद कर दिया। अल्पसंख्यकों में शिक्षा के प्रसार के लिए उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति, उर्दू शिक्षकों को पेंशन, संस्कृत विद्यालयों को अनुदान, मदरसों को प्रस्वीकृति जैसे कदम उठाये थे। यही नहीं मेधावी छात्रों के प्रोत्साहन के लिए बोर्ड परीक्षाओं में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वाले को क्रमशः 3 लाख, 2 लाख व 3 लाख दे पुरस्कृत भी करती थी ताकि वे आगे की पढाई उसी लगन से कर सकें। इसी के साथ 84 हजार शिक्षकों की नियुक्ति भी की गयी।

मसलन, झारखंडी समाजसेवियों का भी कहना है कि मौजूदा सरकार के तुलना में हेमंत सरकार कहीं बेहतर थी और आगे भी राज्य का भविष्य इन्हीं की सरकार में दिखता है।     

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