युद्धोन्माद

युद्धोन्माद के लहरों तले भाजपा की चुनावी गंगा नहाने की तैयारी

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युद्धोन्माद की मैली गंगा में डूबकी लगा वैतरणी पर करने की तैयारी भी फीसSSS.

दिन के उजाले की तरह अब यह साफ़ हो चुका है कि देश में यह युद्धोन्माद की आँच भाजपा की चुनावी गोटी लाल करने का प्रयास भर था। पहले येदुयुरप्पा ने अपनी मुर्खता का प्रदर्शन करते हुए बयान दिया कि एयर स्ट्राइक के बाद पैदा हुई लहर से वे कर्नाटक की सभी लोकसभा सीटें जीत लेंगे। भाजपा के एक और नेता ने आगे बढ़ कर कुछ ऐसा ही बयान दिया कि “इस प्रकरण से जो राष्ट्रीय भावना पैदा हुई है, उसे वे वोटों में तब्दील करेंगे”। इतना कुछ होने के बाद हमारे झारखंडी भाजपा नेता क्यों पीछे रहते, लक्ष्मण गिलुआ ने भी अपनी मूंछो पर ताव देते हुए कह ही दिया कि हिंदुस्तान-पाकिस्तान के इस मुद्दे ने लोकसभा चुनाव में भाजपा की डूबती नैया को सहारा दे दिया है। और वे अब निःसंदेह राज्य की सभी 14 संसदीय सीट जीतेगें।

जिस प्रकार पुलवामा के बाद मोदी जी ने धुंआधार रैलियाँ करके युद्धोन्माद भड़काने और उसे भुनाने की भरपूर कोशिशें की, यह अनायास तो बिलकुल नहीं हो सकता। साजिश की महक तो अबतक आ रही है। और अब भाजपा वाले जिस अंदाज़ में वीर अभिनन्दन की तस्वीर जीप में बाँधकर बेशर्मी से मोदी को सारा श्रेय देने प्रयास कर रहे है – निश्चित ही वोट लूटने की तैयारी में है। मार्के की बात यह है कि जीप में तस्वीर कुछ वैसे ही और उसी जगह बाँधी गयी है जैसे कश्मीर में सेना के एक अधिकारी ने एक युवक को बाँधकर घुमाया था। आखिर ये श्रेय किस बात का ले रहे है?

पुलवामा के बाद भारत ने 62 जवान, एक जहाज़ और एक हेलीकाप्टर खो दिए जबकि पाकिस्तान को केवल एक जहाज़ और जवान का नुकसान हुआ। गोदी मीडिया ने पता नहीं किसके इशारे पर भारतीय हवाई हमले में 300 से लेकर 600 तक आतंकियों के मारे जाने की खबर फैलाई थी, वह सिरे से झूठ निकली, जिसकी पूरी दुनिया में खिल्ली उड़ाई जा रही है। लेकिन सोशल मीडिया पर बैठे भाजपा के भाड़े के भक्त ऐसा माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं या किया है कि जैसे मोदी जी ने सामरिक और कूटनीतिक तौर पर कोई बहुत बड़ा तीर मार लिया हो। इसे ही कहते हैं फासिस्टों का प्रचार-तंत्र।

इन्हीं परिस्थितियों के बीच, सेना के कई रिटायर्ड अधिकारी और कई शहीदों के परिवार वालों द्वारा कही गयी बात कि “युद्ध कोई समाधान नहीं है और राजनीतिक लाभ के लिए युद्ध का माहौल नहीं बनाया जाना चाहिए” को जहाँ गोदी मीडिया ने सिरे से दबा दिया तो वहीं भाजपाई साइबर गुंडे तुरत ऐसा बयान देने वालों को ट्रोल करने लगे। पटना में इनकी रैली में कोई बाधा न पहुंचे, इसके लिए शहीद जवान पिंटू कुमार सिंह की खोज-खबर उनके परिवार तक पहुँचने में विलंब करवाया और उनके अंतिम संस्कार में कोई मंत्री या नेता नहीं पहुँचे। यही नहीं बडगाम के हेलीकाप्टर क्रेश में एयरफोर्स अधिकारी सिद्धार्थ वशिष्ठ सहित जो 6 लोग मारे गए, उनकी शहादत की भी कोई विशेष चर्चा नहीं हुई और उनके भी अंतिम संस्कार को कोई नहीं पहुंचे, जबकि अभिनन्दन की रिहाई को बड़ा मीडिया ईवेंट केवल इस लिए बनाया गया ताकि यह घटना भाजपा को चुनावी फायदे देने वाला था।

लक्ष्मण गिलुआ सरीखे नेता का ऐसे बयान के पीछे रघुवर सरकार का केवल इतना प्रयास है कि जैसे देश भर में मोदी और उनके भक्तों द्वारा राफेल के प्रेत को, नोटबंदी, जी.एस.टी., चम्पत हुए चहेते पूँजीपति, 13 पॉइंट रोस्टर आदि जैसे सभी कंकालों को वापस आलमारी में बंद करने का प्रयास भर है ठीक उसी प्रकार झारखंड में हुए घोटाले, गलत स्थानीय नीति, लैंड बैंक, 13 बनाम 11, भूख से मौत आदि जैसे मुद्दे को भी दबाने/भुलाने का प्रयास भर ही है।  

लेकिन, युद्धोन्माद के शोर के दौरान देश के 5 हवाई अड्डे अदानी को दिए जाने वाली ख़बर, कोर्ट के फैसले की आड़ लेकर 11 लाख से भी अधिक आदिवासियों को दर-बदर कर देने की साज़िश की खबर, रसोई गैस की कीमत 43 रुपये बढ़ने की ख़बर, आरावली पहाड़ की लूट की ख़बर दबाने के बावजूद बाहर आ ही गयी। मसलन, उनका यह फ्रॉड देश की आम-आवाम ने जिस प्रकार नकार दिया है, ठीक उसी प्रकार झारखंड प्रदेश की जनता भी सिरे से नकार देगी। क्योंकि देश को अच्छे भविष्य की उम्मीद चाहिए उन्माद नहीं।

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