मुख्यमंत्री को खुद के विधानसभा का होश नहीं , लेकिन चिंता छत्तीसगढ़ चुनाव की

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मुख्यमंत्री को खुद के विधानसभा का होश नहीं , लेकिन चिंता छत्तीसगढ़ चुनाव की

मुख्यमंत्री को खुद के विधानसभा क्षेत्र का कोई होश नहीं है

हमारे मुख्यमंत्री महोदय इन दिनों झारखंड के ज्वलंत मुद्दों को ताक में रखकर छत्तीसगढ़ के चुनावी रैलियों और सभाओं को संबोधित करने में व्यस्त हैं। रघुबर दास छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार की खूबियाँ गिनाने में मशगूल हैं, जबकि इनको खुद के विधानसभा क्षेत्र का कोई होश नहीं है। जमशेदपुर में क्राइम का उठता ग्राफ मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र की कानून व्यवस्था को मूँह चिढ़ा रही है। और वहाँ से निर्वाचित अपने आपको जनता का दास बताने वाले रघुबर दास को कानोंकान खबर नहीं है।

गौरतलब हो कि जमशेदपुर में हो रहे सिलसिलेवार अपराधिक घटनाओं ने यहाँ की कानून व्यवस्था पर कालिख पोत दी है। अपराधी बेलगाम और बेखौफ घूम रहे हैं और मुख्यमंत्री एवं प्रशासन तमशबीन बनी बैठी है। कुछ दिन पहले टेल्को थाना अंतर्गत राधिकानगर श्रीराम पथ में रहने वाली महिला को घर में बंद कर चार लोगों ने छेड़खानी के बाद दुष्कर्म करने का प्रयास किया, उक्त महिला ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, लेकिन अपराधी अभी तक पुलिस के गिरफ्त से बाहर हैं। सोनारी थाना अंतर्गत मरीन ड्राइव दोमुहानी घाट के पास कदमा शास्त्रीनगर के इंटर द्वितीय वर्ष के छात्र को पल्सर सवार युवकों ने दिनदहाड़े गोली मार दी थी, इस केस में भी पुलिस को अब तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। एक और दिलचस्प मामला सामने आया है, परसुडीह थाना क्षेत्र के प्रमथ नगर के लोगों ने पुलिस के साथ बैठक कर वहाँ खुद रात में गश्ती करने का निर्णय लिया है। लगातार हो रही चोरी को घटना और पुलिस की लचर व्यवस्था के कारण जनता को ऐसा फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। जानकारी के मुताबिक दस अक्तूबर से 15 नवंबर तक की बात करें, तो अब तक करीब 40 लाख रुपये के गहने और अन्य सामान की चोरी चोरों ने की है।

इन्हीं अपराधिक वारदातों के कारण जमशेदपुर दहशत में जीने को मजबूर हैं। परन्तु अभी तक रघुबर दास ने इस पर संज्ञान लेना तक जरूरी नहीं समझा। इनके विधानसभा क्षेत्र की कानून व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ रही है, लेकिन हमारे मुख्यमंत्री महोदय दूसरे राज्यों में अपनी और अपनी पार्टी की फोटोशोप वाली उपलब्धियों को परोसने में मग्न है। पर सच्चाई ये है कि इनसे खुद का चुनावी क्षेत्र सम्भल नहीं रहा, पूरे झारखंड की बात तो दूर है। इसलिए छत्तीसगढ़ की चिंता करना छोड़कर अपने क्षेत्र और लोगों के समस्याओं पर गौर करना रघुबर सरकार के लिए ज्यादा मुनासिब होगा।

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