Welcome to Jharkhand Khabar   Click to listen highlighted text! Welcome to Jharkhand Khabar
  TRENDING
संकट के बीच प्रधानमंत्री का एयर इंडिया वन के रूप में फिजूलखर्ची चौंकाने वाला
भारत पर्यटन विकास निगम और झारखंड सरकार के बीच एमओयू हस्ताक्षर
भाजपा के पाप को धोने फिर उतरी हेमंत सरकार, झारखंडी छात्रों के हित में उठाया बड़ा कदम
साधारण किस्म के धान पर MSP + बोनस देने के मामले में भाजपा शासित बिहार से आगे हेमंत सरकार
भाजपा आखिर क्यों छठ जैसे महान पर्व के नाम पर गन्दी राजनीति करने को है विवश
स्वास्थ्य से लेकर कानून व्यवस्था तक के क्षेत्र में बेहतर काम कर रही है हेमंत सरकार
जनआकांक्षाओं को देख हेमंत सरकार ने बदला अपना फैसला, बीजेपी ने धर्म की राजनीति कर फिर पेश किया अपना चारित्रिक प्रमाण
देश के संघीय ढ़ांच को चोट पहुँचते हुए भाजपा ने कोरोना आपदा को अवसर में बदला!
हशिये पर पहुँच चुके बाबूलाल को पता नहीं,“प्रतिभावान खिलाड़ी पीछे न छूटे, इसलिए हेमंत सरकार द्वारा दिया था एक माह का अतिरिक्त समय”
Next
Prev

झारखंड स्थापना दिवस की शुभकामनाएं

‘पोषण माह’ का ढोल क्यों जब 17500 नवजात बच्चे मर ही जाते है

‘पोषण माह’ मनाने वाले बताएं क्यों 17500 नवजात बच्चे मरते हैं कुपोषण से ?

‘पोषण माह’ मना ढोल पीटने वाले बताएं क्यों 17500 नवजात बच्चे मर जाते है अपने जन्म के पहले ही माह में 

झारखंड के एक गाँव में बैठे गरीबों की आपस में हो रही बात-चीत का एक दृश्य :

संतोखी –   यही दुखीराम दुनिया का रोना रो रहे थे, इस सरकार के आने के बाद दुनिया नरक हो गया है, नरक!

भैया –       तो इसमें कोई सक है? देखते नहीं हमारे गाँव में 50 घर हैं, उनमे से कितने घर हैं, जो पेट भर खा सकते हैं?

दुखीराम – मै समझता हूँ, पांच से अधिक नहीं।

भैया –      और वह पांच भी रुखा-सुखा खा किसी तरह अपना पेट भर लेते है, बाकी पैंतालिस घर में किसी को एक शाम खाना नसीब होता है तो किसी को दो दिन पर मिलता है। चैत में जब फसल कटती है, तो एक आध महीना पेट भर खा लेते हैं। छोटे बच्चों को देखते नहीं, कैसे उनका पेट कमर से सटा हुआ है! किसी के लिए हो कभी-कभी सूखा आकाल, लेकिन हमारे यहाँ के लोगों के लिए तो सदा ही आकाल रहता है, उन्हें सदा ही भूखा रहना पड़ता है।

भैया –     जानते हो जो लोग इतना बीमार पड़ते हैं, वह भी भूखे रहने के कारण ही।…

आज अंतराष्ट्रीय बाल दिवस है जो संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से बाल अधिकारों को मिले स्वीकृति के उपलक्ष्य में 15 से 21  नवम्बर के बीच नवजात सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। जिसका मकसद नवजात के जीवन व उनके समुचित विकास पर केन्द्रित होता है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में 26 लाख नवजात बच्चों की मौत उसके जन्म से एक माह के भीतर ही हो जाती है और झारखंड में इसकी संख्या 17500 है। साथ ही इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च व स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट की माने तो 1990 से 2016 की तुलना में विभिन्न बीमारारियों  से होने वाली मौतों में तीन गुना तक की वृद्धि दर्ज हुई है। झारखंड में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण डायरिया एवं सांस सम्बंधित बीमारी है। 39.4 फीसदी बच्चों की मौत तो अकेले डायरिया तथा सांस संबंधी बीमारियों से हो जाती है। यह सरकार के स्वच्छ भारत मिशन की पोल खोलने के लिए काफी है।

बहरहाल, जिस देश का स्थान ग्लोबल हंगर इण्डेक्स में 119 देशों की सूची में 103वाँ हो, उस देश में समेकित बाल विकास जैसी परियोजना पर निश्चय ही सवाल खड़ा होता है! ऐसे में सवाल यही है कि आँगनवाड़ी केन्द्रों में ‘पोषण माह’ मनाने वाली भाजपा सरकार की नीतियों का आख़िर मकसद क्या है। याद होगा कि झारखंड की बेटी संतोषी की भूख से हुई मौत की ख़बर ने देश का ध्यान आकर्षित किया था। ऐसे गम्भीर मसले के बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ज़िम्मेदार पदाधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। जबकि पोषाहार में ‘छिपकली’ गिरी होने की सूचना देकर बच्चों की जान बचाने वाली सहायिका पर ही दण्डात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया। सरकार ने सितम्बर महीना ‘पोषण माह’ के रूप में मनाया, लेकिन चुनाव से पहले भाजपा द्वारा किये गये पक्के रोज़गार के वायदे का अब तक कोई ज़िक्र नहीं हुआ और पोषण पर ख़र्च की जाने वाली राशि को घटा दिया गया। ऐसे में इस सरकार से यहाँ की जनता और क्या उम्मीद कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related Posts

Click to listen highlighted text!