शिबू सोरेन का झारखंडी खून उबला, कहा सरकार आते ही पाराशिक्षक होंगे नियमित

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शिबू सोरेन

शिबू सोरेन का झारखंडी खून झारखंडी बेटों पर हुए अत्याचार के विरूद्ध इस उम्र में भी उबाल पर 

झारखंड स्थापना दिन के मौके पर पारा शिक्षकों की पिटाई के बाद चार दिन से पारा शिक्षक के साथ-साथ राज्य भर के मुखिया और मनरेगा कर्मी भी अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं। इनके हड़ताल पर होने से पंचायतें और मनरेगा की योजनाएं होने वाली लगी हैं। पूर्ण झारखंड त्रस्त है, हड़ताल को ख़त्म करने के लिए प्रयास छोड़ें प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करने की जुगत में भिडी हुई है। इधर खूंटी सहित अन्य जिलों में मुखिया के काम की जिम्मेदारी बीडीओ दी दी गई है। अब बीडीओ ही मनरेगा की राशि निकासी के पास पर हस्ताक्षर। जबकि सभी जिलों में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, इंजीनियर, लेखा सहायक और रोजगार संबंधी भी राजभवन के समक्ष हड़ताल पर बैठे हैं। मनरेगा कर्मियों के हड़ताल पर होने से मज़दूरों को काम नहीं मिल रहा है।पूर्ण झारखंड जल रहा है और राघबर दास जी इन सबसे बे बेरह छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

केवल रघुवर जी ही बेपरवाह हों ऐसा नहीं है, सरकार के गोद में बैठी आज और अपने स्वाभिमान के प्रचार पर निकले सुदेश महतो की स्थिति बिलकुल मिलती जुलती है। खुद को झारखंडी बेटा कहने वाले सुदेश जी झारखंड के 18 वें स्थापना दिवस के शुभकामनाएं पर झारखंडी बेटों की खाल उतार कर पीटे जाने वाली घटना पर ऐसे चुप हैं जैसे यह सामान्य बात हो। ऐसा वही कर सकता है जोको झारखंडी अस्मिता से कोई सरोकर न हो। अगर आजसु झारखंडियों के हित कि फ़िक्र कर तो उन्हें अबतक ईंट से ईंट बजाते हुए सरकार से अलग हो जाना चाहिए था। परन्तु सत्ता मोहित ऐसा करने से रोक रहा है

हालांकि, हेमंत सोरेन जैसे झारखंड के मिट्टी में रचे-बसे लोग लगातार इसके भंवर कर रहे हैं। दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपने जीवन के इस उम्र में भी झारखंड-पुत्र होने का फर्ज किया जाता है मैदान में कूद पड़े हैं। इन्होंस पारा शिक्षकों और पत्रकारों पर बर्नता की कड़ी निंदा कर रही है बयान दिया है कि झारखंड में झामुमो की सरकार आते हैं लेकिन पाराशिक्षक और उनके जैसे तमाम कर्मियों को पहले प्राथमिकता देते हैं। आगे शिबू सोरेन ने कहा कि राज्य में मूलवासी-आदिवासी नीति में गड़बड़ी के कारण शिक्षक बहाली में 75 प्रतिशत लोग दूसरे राज्य के बहाल हो रहा है। यह झारखंडियों के साथ अन्याय है और वर्तमान सरकार कतई झारखंड हितैषी नहीं है।

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