झारखंड के कुड्मी समुदाय

कुड्मी समुदाय के जीवंत मुद्दों के साथ खड़ा रहने वाला झामुमो इकलौता दल

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

कुड्मी समुदाय के मुद्दों के साथ झामुमो हमेशा खड़ा रहा है 

कथायें कहती हैं कि रावण अपने दस मुँहों से बोलता था परन्तु हर जुबां से एक ही बात कहता था। मगर भाजपा सरकार और उसके अनुषंगी दलों के अनेक मुँह हैं और सभी से अलग-अलग बातें एक साथ बाहर आती हैं। अवाम का ध्यान बिखेरने एवं उन्हें अपने मूल इरादों से पूरी तरह पृथक रखने का यह उनका आज़माया हुआ पुराना नुस्ख़ा है। झारखंड विधानसभा चुनाव के पूर्व से ही यह खेल जारी था और अब सत्ता पर काबिज़ होने के बाद भाजपा और भी शातिराना तरीके से इसे खेल रही है। दिलचस्प बात यह है कि इनके अनेक मुंहों में आजसू एवं जेवीएम जैसी छुपी जुबाने भी मौजूद हैं जो अपने को झारखंडीयों का हितैषी बताती हैं।

झारखंड विकास मोर्चा, संघ के गर्भ से निकली हुई पार्टी है। इसके सुप्रीमो ने अपने जीवन के बेहतरीन 30 वर्ष हाफ पेंट पहनकर झोला टांगकर संघ के प्रचार के लिए दिए हैं तो उनका संघ के प्रति मोह होना भी जायज़ है। वो भाजपा को भले हीं प्रत्यक्ष मदद करते न दिखते हों परन्तु परोक्ष रूप से जरूर मदद करते हैं। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनके विधायक चुनाव जीतते हीं भाजपाई हो जाते हैं। जब भाजपा को किसी भी प्रकार से जेवीएम का सहयोग मिलता है तो झारखंडी जनता को जरूर यह लगता है कि जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल जी का चेहरा झारखंडियों को ठगने के लिए भाजपा द्वारा प्रतिरोपित है।

आजसू हमेशा से ही भाजपा की पिछलगू रही है। जब स्थानीयता का सवाल हो, जब सीएनटी/एसपीटी एक्ट में संशोधन का सवाल हो तो आजसू के ही चन्द्र प्रकाश चौधरी कैबिनेट में बैठकर मुहर लगाते हैं जबकि सुदेश महतो जनता के बीच जा कर कहते हैं कि भाजपा द्वारा स्कूलों को बंद करने का लिया गया निर्णय गलत है। कुड्मी समुदाय आजसू के इस दोहरे चरित्र के उभार को देख झामुमो में अपने भविष्य तलाश रही है। वह यह समझ रही है कि अमित शाह की संगत में चौधरीजी को आजसू से दूर जा रहे हैं। ऐसे में सुदेश जी के पास आजसू को भाजपा में विलय करने के अलावा कोई और विकल्प शेष नहीं रह जाता। ऐसी स्थिति में कुड्मी समुदाय अपने गौरवशाली स्तम्भ शहीद विनोद बिहारी महतो एवं निर्मल महतो का अनुसरण कर भली-भाँति समझ रही है कि झामुमो हीं उनके मुद्दों के साथ खड़ी रह सकती है। यह जायज़ भी है, इसकी प्रमाणिकता इसी से सिद्ध होता है जब सीएनटी/एसपीटी में संशोधन का प्रयास हुआ तो झामुमो के अलावा इनके साथ कोई और खड़ा नहीं दिखा।

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

This Post Has 3 Comments

  1. भगत हाँसदा

    कुड़मी समुदाय के लोग झारखण्ड आंदोलन में उसका अलग भूमिका रही है, आदिवासियों के बाद कुड़मी समुदाय का कुर्बानी और योगदान रहा है। आज सुदेश महतो ने अल झारखण्ड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) को अल झारखण्ड स्टूडेंट यूनियन पार्टी किया है, इसे समझने की आवश्यकता है। आजसू आंदोलनकारियों की यूनियन थी। आंदोलनकारियों की सूची में सुदेश महतो का नाम कहीं नही है। अब समय की पुकार है आदिवासी, कुड़मी एकता होने की। साथ -साथ मुल झारखंडी को भी एक होना पड़ेगा अन्यथा बहरी लोग हम पर जुल्म करते रहेंगे।

    1. jharkhandkhabar

      बिल्कुल सत्य टिप्पणी..

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related Posts