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निर्मल महतो
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निर्मल महतो जैसे महान शहीद के साथ अन्याय क्यों?

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#justice for स्व. निर्मल महतो

वीर शहीद निर्मल महतो झामुमो एवं झारखण्ड के लोकप्रिय के साथ-साथ जुझारू नेतृत्त्वकर्ता रहे हैं। इन्होंने गुरूजी के साथ मिलकर पृथक झारखण्ड के अलख को उत्प्रेरित करने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई थी। दुर्भाग्यवश, साजिशाना तरीके से 8 अगस्त 1987 को इनकी द्वारा चलाये जा रहे क्रांतिकारी मुहिम को शिथिल करने अथवा दबाने की मंशातले इनकी हत्या कर दी गयी। उस दौरान झामुमो के विशाल जनांदोलन के फलस्वरूप बिहार सरकार को हत्या की जाँच सीबीआई को सौंपनी पड़ी। परिणामस्वरूप इनके हत्यारों को उम्रकैद की सजा भी हुई।

अब झारखण्ड के मौजूदा भाजपा की सरकार ने इनके हत्यारों की सजा माफ़ कर रिहा करने का निर्णय ले राज्य में सनसनी फैला दी है। एक बार फिर भाजपा एवं आजसू की दोयामी के साथ-साथ नीची राजनीति झारखंडी जनता के बीच उभर कर सामने आई है। जिससे यहाँ की जनता यह कहने से नहीं चुक रही कि झारखंड की मौजूदा भाजपा एवं आजसू की सरकार को यहाँ के महापुरुषों की शहादत की कोई कद्र नहीं है।

झारखण्ड की बुनियाद निर्मल महतो जी जैसे महापुरुषों के शहादत पर खड़ी है और झारखण्ड का कण-कण हमेशा इनके कर्जदार रहेगा। भाजपा सरकार ने एक बार फिर ये साबित कर दिया की झारखण्ड की संस्कृति एवं धरोहरों से उनका कोई लेना देना नहीं और बिकुल कल्पना से भी परे नहीं कि, सरकार ने इस वीर सपूत के साथ अन्यायपूर्ण रवैया अपनाते हुए इनके हत्यारों की रिहाई को मंजूरी दे दी।

बहरहाल, निर्मल दा ( निर्मल महतो )के प्रति भाजपा सरकार का यह रुख कतई  चौंकाने वाला नही है। परन्तु दुःख तो इस बात का है कि उन्हीं के समाज से राजनीति करने वाले महाशय सुदेश महतो जी के सरकार में होते हुए भी यह अनहोनी कैसे संभव हुआ। जो निर्मल दा ( निर्मल महतो ) द्वारा गठित आजसू से मिलता जुलता नाम रखने वाले राजनैतिक दल के सुप्रीमों हैं, उनकी चुप्पी इस पूरे प्रकरण में कहीं न कहीं अप्रत्यक्ष तौर पर सहमति जाहिर करती है। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि जिन तत्वों के विरुद्ध निर्मल दा ने ताउम्र अपनी आवाज बुलंद की और लड़े, उन्ही की छाँव में बैठ कर सुदेश जी ने झारखण्डवासियों के साथ केवल बेईमानी ही नही की बल्कि निर्मल दा, जिनके नाम तले अपनी राजनीति चमकाई, उन्हीं की गरिमा को धूमिल किया है। साथ ही झारखण्ड के महतो समाज के महापुरुष का अपमान भी।

ऐसे में अगर प्रदेश की जनता इस महापुरुष की शहादत के साथ अन्याय करने में भाजपा सरकार के साथ साथ उनके विचारो की राजनीति करने वाली आजसू भी बराबर की भागीदार मान रही है तो पूरी तरह से युक्तिसंगत है।

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