भाजपा प्रवक्ता को पता ही नहीं – वैश्विक आपदा के मौत के आंकड़े केंद्र जारी करती है 

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मौत के आंकड़े

कोरोना संक्रमण में हुई मौत के आंकड़ों के मामले में झामुमो ने भाजपा पर पलटवार किया है. झामुमो ने साफ़ कहा है कि मौत के आंकड़े केंद्र सरकार द्वारा जारी किये जाते हैं. राज्यों के लिए मौत के आंकड़े जारी करने का प्रोटोकॉल नहीं है. केंद्र सरकार को कोरोना महामारी के दौरान हुई मौतों का ऑडिट कराना चाहिए. झामुमो प्रवक्ता व महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा के प्रवक्ता बेतुका सवाल करते हुए राज्य सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी से कितनी मौतें हुई.

झामुमो के प्रमुख सवाल 

  • आइसीएमआर मृत्यु का प्रोटोकॉल भी जारी करे, 2020 से 2021 तक हुई मौत का ऑडिट कराये
  • भाजपा के 16 सांसद केवल ताली बजाते हैं, केंद्र से सवाल नहीं पूछते
  • बौखलाहट में किसानों को मवाली कहा जाना, अघोषित आपातकाल ही तो है

आइसीएमआर ने कोरोना के इलाज से लेकर मौत के बाद अंतिम संस्कार तक का प्रोटोकॉल जारी किया. लेकिन उसमे मौत के कारण को लेकर कोई प्रोटोकॉल नहीं था. झामुमो प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार को आइसीएमआर को निर्देश देना चाहिए कि मौत के कारणों का भी प्रोटोकॉल जारी हो. जिससे साफ हो पायेगा कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी से कितने लोगों की मौत हुई है. झामुमो नेता ने कहा कि मौत के आंकड़े/संख्या तो भारत सरकार छुपा रही है. और संसद में सरकार झूठ बोलती है. और राज्य से निर्वाचित भाजपा के 16 सांसद सवाल पूछने के बजाय केवल ताली बजा रहे हैं.

भाजपा सांसद केंद्र सरकार से सवाल नहीं पूछते

झारखंड से निर्वाचित भाजपा के सांसदों को शर्म आनी चाहिए कि वे केंद्र सरकार से सवाल नहीं पूछ रहे. उन्हें भारत सरकार से पूछना चाहिए कि ऑक्सीजन की कमी व कुप्रबंधन से कितनी मौतें हुई है. प्रवक्ता ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान कई तरह की घटनाएं हुईं. अब भाजपा के लोग नाटक कर रहे हैं. चरित्र-चेहरा बेनकाब होने के बाद भी वह देश से माफी नहीं मांग रहे. देश के अन्नदाता किसान आंदोलनरत हैं और हताशा में भाजपा के मंत्री सम्मानित अन्नदाता को मवाली कहते हैं.

किसान को मवाली व गरीबों को गाली देने का लाइसेंस इनको कैसे मिल गया है. बौखलायी केंद्र सरकार ने देश में आपातकाल का हालात बना दिया है. केवल औपचारिक घोषणा ही शेष बच गया है. जनता के साथ इन्हें अब पीछे से नहीं बल्कि सीधा संघर्ष में आ जाना चाहिए. 70 के दशक में भी ऐसी बर्बरता हुई थी. प्रेस बिल आया था, उसका खात्मा हुआ. अभी जो भाजपा द्वारा काला अध्याय शुरू हुआ है, उसका भी नया सवेरा जल्द आने वाला है.

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