हेमंत काल में नक्सल प्रभावित इलाके मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं – मधुमक्खी पालन बना जीविका का आधार 

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मधुमक्खी पालन बना जीविका का आधार 

झारखंड में नक्सल प्रभावित इलाके की जनता मुख्यमंत्री हेमंत के शासन में मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. सरकार के मदद से मधुमक्खी पालन कर अपनी जीविका बसर कर रहे हैं

हेमंत काल में नक्सल प्रभावित इलाके की जनता मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और सरकार की मदद से स्वरोजगार कर अपनी जीवका बसर कर रहे हैं. ज्ञात हो, पूर्व सरकार में गुमला के बिशुनपुर प्रखंड की गणना घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में होती थी. लेकिन हेमंत के दौर में बनालात इलाके में 20 किसान मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला विकास भारती बिशुनपुर द्वारा संचालित डीबीटी किसान नेटवर्क परियोजना के तहत किसान मधुमक्खी पालन कर अपनी जीविका को सुदृढ़ कर है. बनालात गांव के चारों तरफ जंगल होने के कारण यह क्षेत्र मधुमक्खी पालन के लिये उपयुक्त साबित हो रहा है.

मधुमक्खी पालन से तिलहनी फसलों के उत्पादन में 15-20% तक की बढ़ोतरी

सरकार द्वारा तिलहनी फसलों सरसों जटंगी आदि की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इस क्षेत्र में मधुमक्खी पालन के कारण तिलहनी फसलों के उत्पादन क्षमता में 15-20% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है. साथ ही कुछ दलहनी फसलों में मधुमक्खियों के लिये पराग एवं रस पर्याप्त मात्रा में पाए जाने के कारण मधुमाखी पालन भी आसान हो गया है. एक दूसरे के पूरक होने के कारण मधु व फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है. जो किसानों के लिये वरदान साबित हो रहा है. और उन्हें पलायन करने से रोक रहा है.

मसलन, प्रत्येक वर्ष प्रत्येक मधुमक्खी परिवार के छत्ते से 40 से लेकर 60 किलोग्राम तक मधु प्राप्त होता है. इससे भविष्य में बनालात क्षेत्र के किसानों की आय में बढौतरी होगी. जो प्रदेश से किसानो के पलायन पर स्थाई विराम लगाएगा. वर्तमान में गुमला जिले में लगभग 300 मधुमक्खी पालक मधु उत्पादन के कार्य से जुड़े हैं. मधुमक्खी पालन के कार्य में मालकन उरांव, अवध सिंह, अश्विन लकड़ा, प्रेम पति देवी, सुमित्रा देवी किस्मत देवी जैसे कई किसान शामिल हैं.

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