यूनिसेफ एवं नवभारत जागृति केंद्र के साझा प्रयास -‘बाल पत्रकार कार्यक्रम’ में मुख्यमंत्री  

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अर्से पहले लिखी हरीश चन्द्र पाण्डे की एक कविता की पीडाओं पर कार्य करते झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन. बाल पत्रकार कार्यक्रम में राज्य के बच्चों के भविष्य के मद्देनजर एक बार फिर दिखी उनकी दूरदर्शी सोच :

आपदाएं बताकर नहीं आती, हालात के साथ आगे बढ़ने की जरूरत.

अंधविश्वासी परंपराओं का इलाज सिर्फ शिक्षा, बेहतर शिक्षा व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता

 हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड – अवसर – बाल पत्रकार कार्यक्रम

कविता – बच्चे

…चूंकि बच्चे, विपक्षी की भूमिका नहीं निभा सकते

चूंकि बच्चों की, कोई सरकार नहीं होती, चूंकि बच्चे,

अपने खिलाफ जांच में

जेबों के अस्तर तक उलट कर रख देते है

इसलिये बच्चो के बारे में, गंभीरता से सोचो…

हरीश चन्द्र पाण्डे

इसी दिशा में शायद झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आगे कदम बढ़ा दिया है. ज्ञात हो, ‘बाल दिवस’ के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में यूनिसेफ एवं नव भारत जागृति केंद्र रांची के संयुक्त प्रयास से ‘बाल पत्रकार कार्यक्रम’ आयोजित की गई. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यूनिसेफ के बाल पत्रकारों से मुलाकात कर उनसे बाल अधिकारों एवं बच्चों के मुद्दों को लेकर बातचीत की तथा उनका उत्साहवर्धन किया. इस कार्यक्रम में 10 बाल पत्रकारों ने हिस्सा लिया तथा मुख्यमंत्री के समक्ष अपने सपनों, आकांक्षाओं एवं चुनौतियों को साझा किया. 

बाल पत्रकार की टीम ने कोरोना महामारी के दौरान बच्चों में हुई समस्याओं व चुनौतियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया. विशेषकर महामारी के कारण उनकी शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा है. महामारी के दौरान गरीब, जरूरतमंद बच्चों के पास स्मार्टफोन, पीसी आदि की अनुपलब्धता के कारण ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने में उनके समक्ष चुनौतियां आयीं. बाल पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करते हुए सभी स्कूलों को खोला जाए, ताकि बच्चे पारंपरिक रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें और स्कूल के माहौल फिर जी सकें.

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था में सुधार सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने बाल पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी बाल पत्रकार शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं बाल अधिकारों के संबंध में सकारात्मक संदेश का प्रचार-प्रसार कर समाज में उदाहरण स्थापित कर रहे हैं. हमारी सरकार बच्चों की समस्याओं एवं चिंताओं पर निरंतर नजर रख रही हुई है. विशेषकर महामारी के कारण झारखंड के बच्चों की बाधित शिक्षा की भरपाई कैसे हो इस पर राज्य सरकार सरकार काम कर रही है. सरकार स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी उपाय कर रही है. 

स्कूलों के संचालन हेतु संक्रमण की स्थिति पर नजर रखते हुए चरणबद्ध तरीके से विद्यालयों में पठन-पाठन प्रारंभ करने का प्रयास कर रही है. निकट भविष्य में प्राथमिक विद्यालय भी फिर से खुलेंगे. स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षक एवं छात्र अनुपात के बीच के अंतराल को भरने की लगातार कोशिश की जा रही है. राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 680 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया गया है, जो कि इसी दिशा में एक मजबूत पहल है. सभी बच्चों को समान अवसर मिले और उनका विकास हो, राज्य सरकार की प्राथमिकता है. 

मुख्यमंत्री – हर चीज के दो पहलू होते हैं. महामारी के दिनों में बच्चों को घरों से ही ऑनलाइन क्लास करनी पड़ी है. ऑनलाइन क्लास अच्छा भी है तो उसके नकारात्मक परिणाम भी हैं. अब हमारे जीवन के कई महत्वपूर्ण कार्य अब ऑनलाइन हो रहे हैं, इसमें शिक्षा भी शामिल है.

आपदाएं बताकर नहीं आती, हालात के साथ आगे बढ़ने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को निश्चित रूप से पता है कि वैश्विक महामारी के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुआ है. साथ ही साथ बच्चों को पारिवारिक समस्याओं तथा मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ा है. ऐसे तो देश और दुनिया में कई प्रकार की महामारी आ चुकी है परंतु कोरोना संक्रमण ऐसी महामारी है जिसने हर वर्ग अमीर-गरीब, किसान-मजदूर सभी को प्रभावित किया है. मनुष्य के जीवन चक्र को ही अस्त-व्यस्त कर दिया. समस्या अभी भी टला नहीं है चुनौती बन सामने खड़ी है. 

नतीजतन, अब हमें जीवन को संभालने के लिए रास्ता निकालना पड़ रहा है. राज्य सरकार लगातार स्थिति को सामान्य करने की दिशा में कार्य कर रही है. स्थिति सामान्य हो भी रही है और हम आगे बढ़ भी रहे हैं. मुख्यमंत्री ने यूनिसेफ एवं नव भारत जागृति केंद्र के प्रतिनिधियों को इस कार्यक्रम के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. कहा कि हम सभी को जीवन में हमेशा याद रखनी होगी की समस्याएं कभी भी आ सकती हैं. आपदाएं बताकर नहीं आएंगी बल्कि किसी भी क्षण अचानक आ सकती हैं. ऐसे हालत में हम सभी को साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा.

अंधविश्वासी परंपराओं का इलाज केवल शिक्षा

मुख्यमंत्री ने उपस्थित बाल पत्रकारों से कहा कि समाज में अंधविश्वासी परंपराएं भी हैं. बाल विवाह, डायन-बिसाइन, ओझा-गुणी सहित कई अंधविश्वासी परंपराएं अभी भी समाज में मौजूद हैं. जिसका इलाज केवल शिक्षा है. जैसे-जैसे लोग शिक्षित होंगे, ऐसी समस्याएं भी स्वतः खत्म होंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि आपके द्वारा साझा किए गए अनुभव और बातों को ध्यान में रखते हुए जो कमियां होंगी राज्य सरकार उसे दूर करने का हर प्रयास करेगी. मौके पर सभी बाल पत्रकारों ने स्वयं तैयार किया गया ग्रीटिंग कार्ड्स मुख्यमंत्री को भेंट की. मुख्यमंत्री ने सभी बाल पत्रकारों को कलम भेंट कर सम्मानित किया तथा उन्हें अपनी शुभकामनाएं दीं.

मुख्यमंत्री से बाल पत्रकार की टीम ने कई प्रश्न भी पूछे

प्रश्न-1 बड़े बुजुर्गों को कोरोना का टीका लग चुका है, बच्चों को कब लगेगा?

उत्तर – किसी भी वायरस का टीका बनने में वक्त लगता है परंतु कोरोना महामारी का टीका देश एवं दुनिया के वैज्ञानिकों ने जल्द बनाने सफलता पायी है. उम्मीद करता हूं कि निकट भविष्य में बच्चों के लिए भी कोविड-19 का टीका वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया जाएगा. जब तक बच्चों के टीकाकरण कार्य नहीं हो पा रहे हैं तब तक जागरूक एवं बचाव ही कोरोना संक्रमण से बचने का कारगर और सफल उपाय है.

प्रश्न-2 राजकीय मध्य विद्यालय बीआईटी मेसरा का छत पक्का नहीं है, क्या राज्य सरकार इस विद्यालय के छत को पक्का करने का कार्य करेगी?

मुख्यमंत्री – बहुत जल्द राजकीय मध्य विद्यालय बीआईटी मेसरा के छत का पक्काकरण कार्य किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि झारखंड के वैसे सभी विद्यालय जहां के भवन क्षतिग्रस्त हो अथवा पक्का न हो, वैसे विद्यालयों का जीर्णोद्धार तथा पक्काकरण का कार्य जल्द किया जाएगा.

प्रश्न-3 स्कूलों में ऑनलाइन सुविधा पर्याप्त नहीं है, क्या आने वाले समय में अध्ययनरत छात्रों के लिए ऑनलाइन सुविधा मिलेगी?

उत्तर – बहुत ही अहम सवाल है. आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है. शिक्षा के साथ-साथ और कई ऐसी चीजें हैं जो आपदा में प्रभावित हुई हैं. स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को शिक्षण कार्य में बाधा अथवा रुकावट उत्पन्न न हो इस निमित्त राज्य सरकार तत्परता से कार्य कर रही है. आने वाले समय में इन समस्याओं का निराकरण सरकार अवश्य करेगी.

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