नीरा यादव का कोरोना काल में शिक्षण व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप हस्यास्पद

पूर्व मंत्री नीरा यादव महोदया को ज्ञात नहीं -बीजेपी की गलत नीतियों से पहले ही झारखंड का शिक्षण व्यवस्था में 20 साल पीछे है, झारखंड में  मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन के प्रयास बेहतर शिक्षा व्यवस्था का परिचायक

रांची। भाजपा महिला नेत्री सह पूर्व मंत्री नीरा यादव महोदया का हेमंत सरकार पर लगाया गया विफलता आरोप, बेबुनियाद व भ्रम है। जबकि पूर्व शिक्षा मंत्री जरा भी मलाल नहीं है कि भाजपा की ही गलत नीतियों के कारण झारखंड 20 साल पीछे जा चुका है। जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रयास बिना आरोप- प्रतिआरोप, राज्य को एक बेहतर दिशा में ले जाने वाली है। ऐसे में नीरा यादव द्वारा हेमंत सरकार पर कोरोना काल को लेकर, राज्य की शिक्षण व्यवस्था के ध्वस्त होने का आरोप लगाया जाना, हस्यास्पद नहीं और क्या हो सकता है। 

पूर्व की शिक्षा मंत्री महोदया द्वारा मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया जाना उनकी मानसिकता का परिचय हो सकता है। क्योंकि कोरोना काल में शिक्षण व्यवस्था का ठप होने श्रय हेमंत सरकार पर नहीं बल्कि उनकी केंन्द्रीय भाजपा की सत्ता को जाती है। शायद उन्हें ज्ञात नहीं है कि हेमंत सरकार स्कूलों का पहले खुलवाने का मतलब ही स्कूलों के सेनेटाईज़ करने से है। ऐसे में कोरोना काल में शिक्षण व्यवस्था का ठ़प होने आरोप, सत्य मानना तो दूर स्वीकार करना भी हस्यास्पद हो सकता है। 

सरकारी शिक्षण व्यवस्था को ध्वस्त व जेपीएसएसी-जेएसएससी को विवादित होना, भाजपा की गन्दी व फूट डालो राज करो की अनैतिक राजनीति का फल 

क्या नीरा यादव महोदया को ज्ञात नहीं कि राज्य गठन कजे 20 साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान अधिकांश, करीब 15 साल की सत्ता बीजेपी की रही है। क्या इस सत्ता काल में बीजेपी ने शिक्षण व्यवस्था को ध्वस्त करने में कोई कसर छोड़ा है? इस सत्ता ने जहाँ सरकारी स्कूलों को बदहाली तक पहुंच दिया गया। वहीं राज्य के युवाओं को रोज़गार देने वाली संवैधानिक संस्था जेपीएसएसी – जेएसएससी को गन्दी राजनीति के मद्देनज़र विवादित बनाकर, पूरी प्रणाली को ही खत्म कर दिया।

ज्ञात हो कि झारखंड की पिछली पांच साल की सरकार भी भाजपा की ही रही। इस दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास की अपरिपक्कव नीतियों ने करीब 6,500 स्कूलों का विलय के नाम पर बंद करा दिया। भाजपा के 2 केंद्रीय मंत्री समेत पार्टी के सभी 12 लोकसभा सांसद भी मानते हैं कि स्कूलों का मर्जर तत्कालीन सरकार का एक अव्यवहारिक निर्णय था। जिससे बच्चों और शिक्षकों पर गलत प्रभाव पड़ा। जिसकी पुष्टि मुख्यमंत्री रघुवर दास को इनके द्वारा विरोध में लिखा गया चेतावनी भरा पत्र हो सकता है। 

कोरोना काल में दीदी किचन का संचालन व आंगनबाड़ी सेविकाओं को 75 करोड़ की आर्थिक मदद करना , आसान नहीं 

नीरा यादव कहती है कि कोरोना काल में शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गयी। लेकिन इस कोरोना में पढ़ाई तो छोडिए, जीवन बचाना मुश्किल हो गया था। वह भी तब, जब केंद्र की मोदी सरकार झारखंड जैसे गरीब राज्य से भेदभाव करने से नहीं चुकी। राज्य के मजदूरों को सड़कों पर पैदल चलने के लिए छोड़ दिया गया। भाजपा के सांसद दिल्ली में उनकी मदद करने के बाजाय जान बचाकर झारखंड भाग आये। ऐसे में पूर्व शिक्षा मंत्री का कहना कि हेमंत सरकार कोरोना से निपटने में असफल रही, हास्यास्पद नहीं तो और क्या हो सकता है। 

दीदी किचन योजना पर सवाल उठा कर वह राज्य की बहनों की समर्पित कर्मठता पर सवाल उठा रही है। जो उनकी मानसिकता! का परिचय देती है। जबकि राज्य इससे इनकार नहीं कर सकता कि हेमंत सरकार के दीदी किचन योजना झारखंड को इस महामारी से बचाया है। कोई भी व्यक्ति राज्य में भूखा नहीं रहा। आंगनबाड़ी सेविकाओं ने जिस तरह इस योजना में हेमंत सरकार के साथ बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। वह सराहनीय ही नहीं राष्ट्रभक्ति भी दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने संकट काल में  आंगनबाड़ी सेविकाओं के मदद के लिए 75 करोड़ रूपये की राशि की स्वीकृति भी दी। 

नीरा यादव बताए कि आखिर भाजपा सरकार में कैसे हो गया छात्रवृत्ति घोटाला

नीरा यादव हेमंत सरकार में मिड डे मिल में बड़ा घोटाला की बात करती है। जबकि भाजपा नेता यह बताने में अबतक विफल रही कि आखिर उनकी पांच साल की सत्ता में केंद्रीय छात्रवृत्ति योजना (Scholarship Scheme) में बड़ा घोटाला कैसे हुआ। इस घोटाले में तो भाजपा कोटे से कैबिनेट मंत्री रही लुइस मरांडी का नाम सामने आया। हेमंत सोरेन ने राज्य की जनता को सच बताने के लिए इस घोटाले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से कराने की अनुमति दे दी।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के घोटाले की जांच रिपोर्ट आती हैं, तो राज्य के भाजपा के कई नेताओं के नाम सामने आ सकते है। अंदरखाने में यह चर्चा जोरों पर है कि प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के इस घोटाले में गरीब अल्पसंख्यक छात्रों को बिचौलियों, स्कूल ऑथोरिटीज, राज्य के अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की सांठगांठ से ठगा गया था। 

जब नई शिक्षा नीति से निजीकरण वे व्यापारीकरण को मिलेगा बढ़ावा, तो विरोध क्यों नहीं

केंद्र द्वारा लायी नई शिक्षा नीति पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विरोध पर भी नीरा यादव महोदया ने सवाल उठाया है। लेकिन, सवाल उठाने से पहले उन्हें यह समझना चाहिए कि हेमंत सोरेन का बतौर मुख्यमंत्री मानना है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा में निजीकरण और व्यापारीकरण को बढ़ावा मिलेगा। जो समानता मौलिक अधिकार पर आघात होगा। अगर केंद्र अपनी गलत नीतियों से राज्य को 20 साल और पीछे ले जाना चाहती है, तो हेमंत सरकार जैसे जिम्मेदार मुख्यमंत्री को सवाल उठाना जायज़ है।

मेडम कहती हैं कि इससे सहकारी संघवाद की भावना को चोट पहुँहेगा, लेकिन सच तो यह है कि नई नीति को लागू करने के लिए बजट की उपलब्धता कैसे होगी, इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इससे झारखंड जैसे पिछड़े राज्यों को निश्चित रूप से नुकसान होगा।

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