मानवीय पक्ष को नकारना दर्शाता है कि बाबूलाल जी के शब्दों ने भी बदल लिया है दल

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बाबूलाल जी

रांची : भाजपा विधायक सीपी सिंह को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन हाथ पकड़ कर अपने साथ अपनी गाडी में बिठाते है. और खुद गाडी चलाकर उन्हें उद्घाटन कार्यक्रम में शरीक होने के लिए पटेल पार्क ले कर आते है. जो झारखण्ड की महान परम्परा, बुजुर्गों को मान देना प्रदर्शित तो करता ही है, विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष का लोकतंत्र में निहित उस महान लकीरों के प्रति आदर भाव भी दर्शाता है. जिसके अक्स में विपक्ष की भूमिका को भी महत्त्वपूर्ण माना गया है. जो भाजपा के लिए आईना भी हो सकता है जिसमे उसके सत्ता के दौर में विपक्ष को नकारने की कई तस्वीरे दर्ज है.   

वहीं दूसरी तरफ उसी दल के नेता बाबूलाल मरांडी, लोकतंत्र के लकीर की संरक्षण, सत्ता पक्ष की इस तस्वीर पर महज एक शब्द कहने की इच्छाशक्ति तो नहीं दिखा पाते. लेकिन राजनीति करने से नहीं चुकते. बाबूलाल जी एक तरफ हेमन्त सरकार पर प्रदेशवासियों के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप जितनी आसानी लगाते दिखते हैं, उतनी ही आसानी से वह मोदी सरकार को पेट्रोल-डीजल की बढती कीमत पर क्लीन चिट भी देते दिखते है. यह दोहरा रवैया उनके व्यक्तिव का सटीक अभिव्यक्ति कर सकती है. 

दल बदलने वाले संघ प्रचारक बाबूलाल जी के शब्द भी हो चले हैं ब्राह्मणवादी 

ज्ञात हो, कोरोना काल के समाप्ति के उपरान्त हेमन्त सरकार अपने कार्यकाल के शुरूआती दौर से ही प्रदेश में नियुक्ति व रोजगार सृजन के प्रति संजीदा दिखी है. कई मंचों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा नियुक्ति के सन्दर्भ में तमाम परिस्थितियों से जनता को अवगत कराया जा रहा है. लगभग कार्य दिवस हर 15 दिनों में समीक्षा बैठकें आहुत हो रही है. जो हेमन्त सरकार द्वारा जनता से किए गए वादों के प्रति गंभीरता व प्राथमिकता का स्पष्ट उदाहरण है. लेकिन, दल बदलने वाले बाबूलाल मरांडी के शब्दों ने भी दल बदल लिया है.  

मरांडी हेमंत सरकार के 2 वर्ष पर ऊँगली उठाते है लेकिन देश की भयावह बेरोजगारी पर मोदी सरकार को देते दिखते हैं क्लीन चिट 

पत्रकारों से बातचीत में मरांडी हेमंत सरकार की दो वर्ष के शासन काल पर ऊँगली तो उठाते है. लेकिन वहीं मोदी सरकार की विफलताओं को उपलब्धि बताने से नहीं चुकते. मोदी सरकार की रोजगार एवं विकास के वादों को धोखाधड़ी नहीं मानते. देश की भयावह बेरोजगारी पर मोदी सरकार की पीठ थपथपाते हैं. मोदी सरकार हुए किसानों की दुर्दशा पर कोई एक शब्द कहने की हिमाकत नहीं जुटा पाते. उलटे प्रतिपक्ष नेता न बन पाने की खीज सोरेन परिवार पर उतार देते हैं.

ज्ञात हो, पूर्व में दिए टीकाकरण पर झूठे बयान बाजी की भांति उन्होंने इस बार भी कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पेट्रोल एवं डीजल के बढ़ती कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार कारक शेस औए वेट नहीं. उन्होंने भी केंद्र का जुमला प्रदेश में उछालते हुए कहा कि मोदी सरकार वाहनों के संचालन के लिए वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है. देश के पसीने पर खड़ी संसाधनों की बिक्री पर बिना एक शब्द बोले बाख कर निकल लिए. मसलन, इस पुराने संघ प्रचारक में संध की ब्राह्मणवादी ज्ञान की झलक साफ़ दिकहती है.

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