मधुपुर उपचुनाव में भाजपा का बॉरो प्लेयर के सहारे मैदान में उतरने के मायने

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भाजपा के मधुपुर में चुनावी डगर

क्या मधुपुर की जनता गोएठे में घी सुखाने का जोखिम उठा सकती है – भाजपा के मधुपुर में चुनावी डगर कठिन

रांची : कहते हैं आग में हाथ आग बुझाने वाले का जलता है न कि आग लगाने वाले का। झारखंड में मधुपुर विधानसभा ऐसे ही योद्धा पुरुषार्थ के सच को जी रहा है। जहाँ स्थानीय विधायक हाजी हुसेन अंसारी जिनका व्यक्तित्व झारखंड मुक्ति मोर्चा के बुजुर्ग नेता व झारखंड आन्दोलन के अगुआ साथी के तौर पर जुड़ा ऐतिहासिक सच लिए है। कोरोना त्रासदी में महामारी को मात देते हुए शहादत के सच से भी जा जुड़ा है। मधुपुर की जनता अपने नेता को खोने के गम के साथ उप चुनाव के मैदान में उतरना पड़ा है। झामुमो ने तो उसी आन्दोलन खून को चुनाव मैदान में उतार अपनी मानसिकता का परिचय दे दिया है। लेकिन भाजपा को बोरो प्लेयर के साथ उतरना पड़ रहा है।  

भाजपा फिर एक बार किसी भी तरह चुनाव जीतने वाली मानसिकता के साथ, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कही “भाजपा का बस एक ही काम है- कैसे सरकार बनाये और कैसे सरकार गिराये” के सच के साथ चुनावी मैदान में है। पिछली विधानसभा में मिली करारी शिकस्त। बेरमो और दुमका उपचुनाव में भी मिली दोहरी हार का यह बौखलाहट भर हो सकता। जहाँ वह नैतिकता और शुचिता को ताक पर रखते हुए अपनी सहयोगी दल के पीठ पर छुरा आखिरकार घोंप ही दिया। मसलन, अपनी सहयोगी पार्टी आजसू के नेता, गंगा नारायण को भाजपा में शामिल कर। बोरो पलयेर की सहायता से चुनावी मैदान में है। 

धोखा देने की स्थिति में बोरो प्लेयर अपनी रीढ़ की हड्डी गवां चुका होता है

कहा जाता है कि बॉरो प्लेयर कितना ही अच्छा क्यों न हो टीम की नैया पार नहीं लगा सकता। क्योंकि अपनी टीम को धोखा देने की स्थिति में वह अपनी रीढ़ की हड्डी गवां चुका होता है। और उसकी पुरानी टीम उसे ज़मीन दिखाने के लिए कुछ भी कर सकती है। और जिस खिलाड़ी का हक उस बोरो खिलाड़ी ने मारा है वह धड़ा भी उसके राह में कांटे बोये खड़ा होता है। मौजूदा दौर में झारखंड के कैनवास में महागठबंधन की एकता एक मिसाल का सच लिए हुए है। और मधुपुर की जनता अपने ऐतिहासिक नेता के पुरुषार्थ के सच को भी जी रहा है। ऐसे में बॉरो के साथ भाजपा की स्थिति इस उप चुनाव में सही नहीं आंकी जा सकती है। 

मसलन, पूंजीपति पार्टी भाजपा का चुनाव मैदान में बौराने का सच फगुआ का खुमार हो सकता है। लेकिन जनता के माप-दण्डं में भाजपा की लकीर मौजूदा सत्ता के नयी झारखंड के लकीर से छोटी होने का सच जरूर उसके सपने पर पानी फेर सकती है। यही से  भाजपा के जीता पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है कि क्या मधुपुर की जनता गोएठे में घी सुखाने जैसा कदम उठा सकती है। आसार तो नहीं दीखते, भले ही पैसे के खेल माहौल उसके पक्ष में दिखाने का सच उभारे। लेकिन सत्य यही है मधुपुर उप चुनाव में भाजपा की राह कठिन ही नहीं असंभव प्रतीत होती है।

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