केरल का 90% साक्षरता दर को जीना भाजपा के लिए चुनाव में बना सिरदर्द

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केरल का 90% साक्षरता दर

केरल 90 फीसद साक्षरता दर के सच को जीता है। शिक्षित लोगों तार्किक होते है। केरल में शिक्षा बना भाजपा के जीत की राह का रोड़ा  

केरल भाजपा के बुजुर्ग नेता ओ. राजगोपाल कहे कि केरल 90 फीसद साक्षरता दर के सच को जीता है। जिसके अक्स में लोगों का तार्किक होने का सच हैं। शिक्षित लोगों में यह आदत होती हैं। इसलिए पार्टी को चुनाव जीतने में दिक्कत है। तो स्पष्ट रूप में भाजपा और संघ की शिक्षा से डर व खीज, दोनों स्थितियों को समझा जा सकता है। और यह भी समझा जा सकता है कि क्यों मोदी सत्ता में शिक्षा पर धर्म का नियंत्रण पांव पसार रहा है? क्यों परोक्ष-अपरोक्ष रूप में धार्मिक शिक्षा की घुसपैठ का सच भारतीय शिक्षा जी रहा है? क्योंकि धार्मिक शिक्षा में तर्क का स्थान नहीं होता, केवल आदेश ही एक मात्र सच होता है। 

जो भाजपा व संघी मानसिकता आदिवासी-दलित-दमित को नए कपड़े तक पहनने की इजाज़त न दे। वह उस समाज को कलेक्टर, स्कूल टीचर या पुलिस कर्मचारी के रूप में कैसे अपना सकता है। चूंकि प्राचीन काल से ही धर्म का सच बहुजन आबादी के मेहनत की लूट से भी जुड़ा रहा है। उस अक्स में तर्क निश्चित रूप से लूट मानसिकता के राह में रोड़े अटका सकता है। इसलिए मौजूदा दौर में भारतीय शिक्षा की धार को धार्मिक परंपरा की चिंतन से जोड़ा जा रहा है। और एकलव्य-शंबूक को गौण कर मुगल-अंग्रेज शासनकाल के कलंकित वातावरण को धार्मिक चाशनी में पिरो, भ्रम फैलाने की कोशिशें तेज हुई है। 

सरसंघचालक का दिल्ली में 25-26 मार्च 2017 को दो दिवसीय ज्ञान संगम में उपस्थिति के मायने 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का दिल्ली में 25-26 मार्च 2017 को प्रायोजित दो दिवसीय ज्ञान संगम में यही मानसिकता दिखे। जिसके अक्स में संदेश स्पष्ट हो कि भाजपा राजनैतिक वर्चस्व में, राष्ट्रवाद के परदे में ढका भगवा सोच तीव्रता से आगे बढ़े। और एजेंडे को आगे बढऩे की ऊर्जा देशभर से लगभग 700 प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और 51 कुलपतियों की शिरकत से मिले। तो संघ उस मानसिक डर को उभार सकता है। जहाँ अर्थ लूट के मद्देनजर कायम सिंहासन को खोने का खतरा केवल शिक्षा से ही हो सकता है।       

मसलन, शिक्षा पद्धति में आमूल-चूल बदलाव कर संघ भगवा विचारों में देश को रंगना चाहता है। और संघ ने सुव्यवस्थित रणनीति के साथ पहल इस दिन कर दी गयी। क्योंकि उस मानसिकता को चुनौती रोहित वेमुला, जेएनयू – कन्हैया, पश्चिम बंगाल -जादवपुर विवि और असहिष्णुता के खिलाफ बुद्धिजीवियों की अवार्ड वापसी के रूप में मिले हैं। इसलिए संघ ने तमाम परिस्थितियों के बाद इस सोच को धार देने की रणनीति बनायी है। अतः तमाम विपक्ष को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की राह पकड़ते हुए, बौद्धिक मुहिम पर जोर देना होगा। क्योंकि मौजूदा दौर में उस मानसिकता को धन से नहीं शिक्षा से चुनौती दी जा सकती है। क्योंकि झूठ को हमेशा सच से ही खतरा होता है।

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