झारखंडी महापुरुषों के सपनों का निचोड़ है ” फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान “

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फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान

झारखंड के कोढ़ हड़िया-दारू, बनानेवाली महिलाओं की भाग्य बदलती फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान

पिता दिशुम गुरु शिबू सोरेन व उनके दादा सोबरन मांझी की संघर्षीय परंपरा आगे बढाते हेमंत 

राँची। तानाशाही व्यवस्था कभी सनातन नहीं होती, झारखंड में सत्ता परिवर्तन ने साबित किया। शोषित समाज हमेशा अपने हक़ अधिकार के लिये उठता है और दमनकारी व्यवस्था को ध्वस्त कर विजय प्राप्त करता है। झारखंड में ऐसा ही हुआ और पिछले बरस 11 वें मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन ने शपथ ली। और दिशुम गुरु शिबू सोरेन व उनके दादा सोबरन मांझी की अबुआ दिशुम अबुआ राज के आन्दोलन को आगे बढाते हुए हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री के रूप में राज्य के विकास रथ को आगे बढ़ाया। 

सोबरन मांझी ने शिक्षा की ज्योत जला महाजनी प्रथा के खिलाफ आशा की एक किरण दिखायी थी, तो दिशुम गुरु ने उस महाजनी प्रथा के खिलाफ उठे चिंगारी को राज्य के लोगों बीच आन्दोलन बना कर खड़ा किया। सारी जवानी गला कर उन्होंने अलग झारखंड के रूप में हमें नयी सोच का तोहफा, राज्य दिया। ताकि झारखंडवासी अपने त्रासदी से बाहर आये और झारखंड के संपदाओं की लूट पर लगाम लगे। जिससे यहाँ के आदिवासी-मूलवासी को उसका हक-अधिकार मिले।

झारखंड की कई त्रासदियों में एक है गरीबी। जिसके कारण एक तरफ यहाँ के बेटियोंओं का तस्करी होता था तो दूसरी तरफ जीवन-यापन के लिए यहाँ की महिलायें हडिया-दारू बेचने जैसे कोढ़ से अभिशप्त थी। लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता-दादा व तमाम महापुरुषों के पद चिन्हों पर चलते हुए शिक्षा व महिलाओं की आत्मनिर्भरता को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया।  

अबुआ दिशुम अबुआ राज के सपने को बखूबी से आगे बढ़ाते हेमंत सोरेन 

अबुआ दिशुम अबुआ राज के सपना के लिए, हेमंत सोरेन ने ज़िम्मेदारी के साथ झारखंड की मूल-भूत समस्याओं की जड़ से खात्मे के लिए अपने सधे कदम बढाए। इसकी झलक कई योजनाओं में देखने को मिलती है। राज्य की बेटियों को मानव-तस्करों से आज़ाद करा उन्हें शिक्षा व रोजगार से जोड़ा। इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं कि राज्य के हाट-बाजारों में गरीबी के कारण हड़िया-दारू बेचनेवाली महिलाओं को, सम्मानित रोजगार से जोड़ कर उनकी जीवन-यापन की व्यवस्था करना, एक ऐतिहासिक कदम हो सकता है। 

बेहद संवेदनशीलता के साथ राज्य के महापुरुषों के सपनों अंजाम तक पहुंचा रहे हैं मुख्यमंत्री 

झारखंड सरकार ने बेहद संवेदनशीलता के साथ राज्य के महापुरुषों के सपनों के निचोड़ के रूप में फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान को धरातल पर उतारी है। राज्य में यह पहला मौका है जब किसी सरकार ने गंभीरता के साथ महिलाओं की सुधि ली है। भाग्य बदलने की दिशा में योजनाओं का भरपूर लाभ उठाया जा रहा है। तेजी से महिलाओं की आर्थिक स्थितियों में बदलाव देखे जा रहे हैं। जहाँ महिलाएं खुद अपनी तकदीर की राह तय कर रही है। 


पलाश ब्रांड के तहत जिलावार पलाश मार्ट खुलने लगे। जिससे महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बनने लगी हैं। अपने बाल-बच्चों व परिवार के भरण-पोषण करने में सफल होते हुए कामयाबी की नई परिभाषा गढ़ने लगी है। महिलाएं कहती है कि हेमन्त सरकार ने उम्दा कदम उठाया है। अलग झारखण्ड राज्य बनने के बाद यह पहला मौका है, जब अभिशाप के रुप में देखी जानेवाली महिलाएँ हड़िया-दारू बेचना छोड़, अपने गांव-घर में शान के साथ दुकान चला कर आजीविका चला रही हैं।

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