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600 करोड़

600 करोड़ बर्बाद करने वाले सीपी सिंह -एक साल में नगर विकास विभाग बदहाल

विभागीय मंत्री रहते 600 करोड़ बर्बाद करने वाले सीपी सिंह का कहना, “एक साल में नगर विकास विभाग बदहाल” भ्रम फैलना नहीं तो और क्या?

कोरोना महामारी के एक साल में केंद्र सरकार ने अपने शून्य कार्यों को एक्ट ऑफ़ गॉड बताया जबकि इससे इनकार नहीं कि झारखंड सरकार ने काम किये , फिर विभाग बदहाल कैसे?

बीजेपी राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ही उठा चुके है पूर्व विभागीय मंत्री सीपी सिंह के कार्यों पर सवाल 

रांची। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि कोरोना जैसी महामारी के दौर में हेमंत सरकार ने देश भर में पीठ-थपथपाने वाला काम किया है। बकायदा हेमंत सरकार ने अपने एक साल का लेखा-जोखा भी जनता के बीच पारदर्शी तौर पर रखा। शायद इसी घबराहट में प्रदेश बीजेपी के नेता उलुल-जुलूल बयान दे रहे हैं। जाहिर है बीजेपी नेता अपने सरपरस्त आका से बेहतर किसी को नहीं समझते। यही वजह हो सकती है कि उन्होंने कभी सोचा ही था कि सत्ता से बाहर होंगे और हेमंत सरकार इनके पैरों के नीचे से ज़मीन खीच लेगी। 

ज्ञात हो कि जब राज्य में भ्रष्टाचार को चरम तक पहुंचाने में बीजेपी नेताओं ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी, तो जनता ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया। अब भाजपा के सदाचारी! नेता अपनी बदहाली नहीं पचा पाने की स्थिति में हेमंत सरकार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। रांची के विधायक सीपी सिंह, माननीय लंबे समय से रांची से विधायक रहे हैं। उनका कहना है कि विभागीय मंत्री (जो अभी राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं) हेमंत सोरेन सरकार के एक साल में नगर विकास विभाग बदहाल स्थिति में हैं। 

हालांकि भाजपा विचारधारा की परंपरा को निभाने वाले सीपी सिंह, जिनके मंत्री रहते कार्यकाल में, विभाग में सरकार के अरबों रूपये का नुकसान (आप इसे घोटाला भी कह सकते है) हुआ। की नैतिकता आगया देती है कि वह ऐसे आरोप लगाए। इनके संरक्षण में फल-फूल रहे अधिकारियों व ठेकेदारों की एक लंबी फेहरिस्त रही है। इन्होंने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के बजाय केवल चांदी काटी, पूरे रांची शहर को बर्बाद किया, अब सत्ता से बाहर हैं तो शहर की बदहाली दिखती है, जबकि मेयर अबतक इन्हीं के दल का मौजूद है। 

खुद बीजेपी सांसद ने कहा था, योजनाओं के नाम पर चलाया जा रहा धंधा, 600 करोड़ का घोटाला 

भले ही सीपी सिंह नगर विकास मंत्री रहते शहर के सौंदर्यीकरण का दावा करते रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उनके ही पार्टी के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार उनके कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर चुके हैं। जुलाई 2019 में एक पत्र लिख सांसद ने सीपी सिंह को बताया था कि उनके विभाग में योजनाओं के नाम पर धंधा चल रहा हैं। सांसद ने पत्र में कहा था कि 200 करोड़ रूपए खर्च कर शहर में बनने वाले नालों और सीवेरज-ड्रैनेज के नाम पर कारोबार हुआ है। 100 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी हरमू नदी नाली ही रही। राजधानी में विकास काम और तालाबों के सौंदर्यीकरण आदि के नाम पर 300 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है।

इसमें कांके में बने स्लॉटर हाउस, बड़ा तालाब सौंदर्यीकरण, कांटा टोली फ्लाईओवर का अधूरा काम और रातू रोड प्लाईओवर बनाने के लिए डीपीआर में खर्च, कांके में ही अर्बन हाट घोटाला, कोकर स्थित डिस्टलरी तालाब का काम शामिल हैं। यानी कुल मिलाकर 600 करोड़ रूपए पानी की तरह विभागीय मंत्री रहते सीपी सिंह ने बहा दिया। लेकिन शहर वासियों को मिला क्या वही ढाक के तीन पात। अब इनका ऐसा बयान देना भ्रम फैलाना नहीं तो क्या हो सकता है।  

सीपी सिंह कहते हैं, “कोरोना संकट में एक साल बीता, तो विभाग बदहाल कैसे”

पूर्ववर्ती सरकार के योजनाओं का हेमंत सरकार में शिलान्यास साबित करती है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच बीजेपी नेताओं से अलग है। पूर्व की सरकार के अधूरे योजना, जिसपर सरकार का पैसा खर्च हुआ है, जिसमे झारखंडी गरीबों के मेहनत की कमाई लगी है उन योजनाओं को हेमंत सोरेन द्वारा पूरा करना, राज्य के प्रति उनकी गंभीरता को ही तो दर्शाता है। जबकि इस मुद्दे में बीजेपी नेताओं की सोच सत्ता का लोभ के अतिरिक्त और क्या दर्शा सकता है।

बीजेपी नेता सीपी सिंह क्या नहीं समझते कि हेमंत सरकार का 1 साल का कार्यकाल कोरोना महामारी और उनके केन्द्रीय आकाओं की बेप्लानिग लॉकडाउन में व्यवस्था को संभालते बीता है। कुछ वक़्त मिला तो उसका भी सदुपयोग मुख्यमंत्री ने जनता और राज्य के उत्थान में लगाया। जबकि केंद्र की भाजपा सत्ता ने अपने एक वर्ष की नाकामी को एक्ट ऑफ़ गॉड के नाम पर ढकने का प्रयास किया। ऐसे में सीपी सिंह को ही बताना चाहिए कि नगर विकास विभाग के बदहाली का शिव्गुफा भ्रम फैलाने का प्रयास केसे नहीं है?

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