झारखण्ड में ग्रीन राशन कार्ड साबित होगा भूख मिटाने जरिया

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ग्रीन राशन कार्ड साबित होगा भूख मिटाने जरिया

झारखंड के सात लाख गरीब लाभुक परिवारों को न केवल ग्रीन कार्ड का लाभ, बल्कि राशन भी मिलेगा

2018 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट में, झारखंड में महज 57% लोग के ही आयोडीन युक्त नमक सेवन कर पाने का जिक्र हो। सात जिले में आयोडीन ग्रस्त पाए जाएँ। पीडीएस दुकानें आयोडीन विहीन नमक का सच लिये हो। 2016-2018 में रघुवर सत्ता 90 प्रतिशत राशन कार्ड अवैध घोषित कर दे। जिसके अक्स में अतिगरीब जनता सरकार के 1 रुपये किलो नमक लेने से साफ़ इनकार कर दे। यूनिसेफ के खाद्य सुरक्षा अधिकार नियुक्त न होने के मुहर के मद्देनजर, वह सरकार नमक की जांच की ज़िम्मेदारी खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को दे पलड़ा झाड़ ले। वहां हेमंत सरकार की ग्रीन राशन कार्ड को निर्णायक भूमिका के रूप में देखा जा सकता है   

लाॅकडाउन त्रासदी के बाद भी भूख मिटाने के सोच के साथ, सरकार का राशन कार्ड रहित लोगों राशन मुहैया कराने लक्ष्य 

हर समुदाय वर्ग के लिए खाद्य आपूर्ति के निर्धारित लक्ष्य के मातहत धान खरीद से लेकर किसान कर्ज माफी के तरफ मौजूदा सरकार बड़े। लाॅकडाउन त्रासदी के बाद भी लोगों की भूख मिटाने के सोच के साथ, वैसे लोगों को राशन कार्ड मुहैया कराने लक्ष्य निर्धारित करे। जिनके पास अबतक राशन कार्ड नहीं थे। तो निश्चित रूप से ग्रीन राशन कार्ड मानवता की पृष्ठभूमि पर बड़ी लकीर व उपलब्धि मानी जा सकती है। ज्ञात हो, फरवरी माह से झारखंड के सात लाख गरीब लाभुक परिवारों को न केवल ग्रीन कार्ड का लाभ, बल्कि राशन भी मिलेगा। जो पिछली सत्ता में सिमडेगा, रामगढ़, गिरिडीह जिलों में हुई भूख से मौत के घावों पर मरहम का काम भी करेगा। 

मसलन, राशन मुहैया करने के मद्देनजर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के संवेदनशील विचार कार्य योजनाओं को धरातल पर उतारने के प्रति गंभीर हो। और यह प्रयास ग्रीन कार्ड धारकों को नजदिकी डीलर से पांच किलो चावल के रूप में खाद्यान उपलब्ध कराये। तो सिमडेगा के राजेश कुमार,  कर्रा की जुनास गुड़िया, रांची की जयंती कुमारी जैसे लोग हेमन्त सरकार के ग्रीन कार्ड की पहल को ज़रूरतमंदों को पेट भरने की दिशा में सफल प्रयास कह ही सकते है।

नोट : ग्रीन कार्ड धारकों को जनवरी और फरवरी दोनों महीने के एकमुश्त राशन एक रूपए प्रति किलो सरकारी दर पर दिया जाएगा। सरकार व्यवस्था के मातहत इच्छुक लाभुक अपने डीएसओ कार्यालय या अपने पंचायत में ऑनलाइन आवेदन जमा कर कार्ड बनवा सकता है।

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