झारखंड को “कुपोषण मुक्त” बनाने की राह पर मजबूती से बढ़ रहे सीएम हेमंत सोरेन

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राज्य

दीदी किचन योजना, राज्य खाद्य सुरक्षा योजना लाकर मुख्यमंत्री ने पहले ही बता दिया है अपना इरादा

रघुवर दास ने डंके की चोट पर कहा था कि झारखंड के नौनिहाल बच्चों को उनकी सरकार कुपोषण से मुक्ति दिलाएगी। प्रयास केवल कागज़ों तक ही रहा सीमित

अब राष्ट्रीय कुपोषण माह में जनभागीदारी की हेमंत सोरेन ने की अपील

रांची। राज्य गठन के बाद से ही झारखंड कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है। लंबे समय तक झारखंड की सत्ता में बैठे भाजपा नेताओं ने इस अभिशाप से झारखंडी जनता को मुक्त करने का वादा तो किया लेकिन वादा केवल वोट बैंक तक ही सीमित रहा। बीजेपी से पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने तो डंके की चोट पर कहा था कि झारखंड के नौनिहाल बच्चों को उनकी सरकार इस दंश से मुक्ति दिलाएगी। आदिवासी इलाकों में कुपोषण के खात्मा के लिए सरकार विशेष कदम उठाएगी। लेकिन यह प्रयास भी केवल कागजों तक ही सीमित रहा।

सभी जानते हैं कि बीजेपी की पिछली रघुवर सरकार में कई लोगों की मौत केवल भूख से ही हुई थी। दूसरी तरफ वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य को “कुपोषण मुक्त” बनाने की राह पर मजबूती से बढ़ रहे है। एक राजनेता की तरह नहीं बल्कि झारखंडी बेटे की तरह उन्होंने राज्य को इस दंश से मुक्ति दिलाने की ठानी है। बीते दिनों कई प्रयासों की शुरूआत कर श्री सोरेन ने अपना इरादा मजबूती से स्पष्ट कर दिया है। सीएम जानते है कि राज्य में कुपोषण की दर करीब 45% है, जो कि एक गहन चिंता का विषय है।

दीदी किचन से ग्रामीण इलाकों में कुपोषित बच्चों का वजन बढ़ा।

कोरोना को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में दीदी किचन योजना की शुरूआत की थी। उनका मानना था कि इस दौरान राज्य में कोई भी भूखे नहीं सोये। सीएम के इस प्रयास को झारखंड में फैले कुपोषण को रोकने का पहला कदम माना गया। स्वंय हेमंत सोरेन ने एक बैठक में यह स्वीकारा था कि लॉकडाउन में संचालित दीदी किचन से एक महत्वपूर्ण बात सामने आयी है। जहां ये संचालित थी, उन ग्रामीण इलाकों में कुपोषित बच्चों के वजन में इजाफा हुआ है। बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार देखा गया। हेमंत ने कहा कि झारखंड के लिए गरीबी और कुपोषण अभिशाप रहा है। लेकिन अब राज्य सरकार कुपोषित बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए योजना पर कार्य कर रही है।

कुपोषण मिटाने में मींल का पत्थर साबित होगा झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना

बीते दिनों मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने राज्य में झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना लागू करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। योजना के लिए 213 करोड़ रूपये की स्वीकृति भी दी गयी है। यह तय है कि राज्य को कुपोषण के दंश से मुक्ति दिलाने मे यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि राज्य के करीब 15 लाख गरीब लोगों को सरकार अनुदान पर राशन देगी। वे वैसे लोग है, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और न ही वे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन पाते है। योजना के तहत ऐसे लोगों को सरकार 1 रूपये प्रति किलो प्रति लाभुक प्रति माह 5 किग्रा खाद्यान दिया जाएगा।

हेमंत की अपील, “जनभागीदारी से कुपोषण मुक्त बनेगा झारखंड”

राज्य को कुपोषण मुक्त बनाने में जनसमुदाय की भागीदारी की बात करते हुए हेमंत सरकार राज्य में 1 से 30 सितंबर राष्ट्रीय कुपोषण माह मना रही है। सीएम ने कहा है कि उनकी सरकार कुपोषण के कलंक को मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पोषण सुधार के लिए सरकार के इस मुहीम में सभी लोगों को आगे बढ़कर जुड़ने की अपील की है। हेमंत का मानना है कि सभी यह सुनिश्चित करें कि सभी बच्चें, किशोरियां, गर्भवती व धात्री माताओं को घर में उपलब्ध पौष्टिक भोजन मिल सके। अगर ऐसा होता है, तो “कुपोषण मुक्त झारखंड” बनाने का सपना पूरा हो सकेगा।

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