झारखंड और बंगाल जैसे राज्य आखिर क्यों केन्द्रीय भाजपा को खटक रहे हैं?

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झारखंड और बंगाल

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव का बयान – झारखंड और बंगाल संघीय व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं – ऐसे में बड़ा सवाल – क्या भाजपा शासन में अधिकार मांगना खता है? या संविधान के अक्षरों को पढ़ना गुनाह? 

रांची : संघीय व्यवस्था का मूल तत्व क्या है? विविधताओं के मद्देनजर संविधान में भारत को संघात्मक शासन व्यवस्था का दर्जा मिला. इसलिए संविधान के प्रथम अनुच्छेद में ही कहा गया है कि “भारत, राज्यों का एक संघ होगा.’’ भारतीय संघ व्यवस्था में संघात्मक शासन के प्रमुख चार अंग हैं: (1) संविधान की सर्वाेच्चता, (2) केन्द्रीय सरकार और राज्यों की सरकारों में शक्तियों का विभाजन, (3) लिखित और कठोर संविधान, (4) स्वतन्त्र उच्चतम न्यायालय. 

  • संविधान की सर्वाेच्चता: भारतीय संविधान देश का सर्वोच्च कानून है. संविधान की व्यवस्था केन्द्रीय सरकार और सभी राज्य सरकारों पर बंधनकारी हैं और इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता.
  • शक्तियों का विभाजन: भारतीय संविधान द्वारा संघ और राज्यों के बीच शक्ति विभाजन किया गया है. संघ सूची में 99 विषय हैं जिन पर संघीय शासन को क्षेत्राधिकार प्राप्त है. राज्य सूची के विषयों की संख्या 61 हैं. ये विषय सामान्य परिस्थितियों में राज्य सरकारों के अधिकार में हैं. समवर्ती सूची में विषयों की संख्या 52 है जिन पर संघ तथा राज्य दोनों को क्षेत्राधिकार प्राप्त है.
  • लिखित और कठोर संविधान: भारतीय संविधान एक लिखित संविधान है और संविधान संशोधन की दृष्टि से कठोर भी है. 
  • स्वतन्त्र उच्चतम न्यायालय: संविधान में संविधान के संरक्षण के लिए एक स्वतंत्र उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था है. संविधान ने एक सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की स्थापना की है. जिन्हें संघीय संसद या राज्यों की व्यवस्थापिकाओं द्वारा पारित किसी भी ऐसे कानून जो संविधान व्यवस्था के विरुद्ध हो, अवैधानिक घोषित करने का अधिकार प्राप्त है. 

संघ अपनी विचारधारा देश पर थोपने के लिए, तो भाजपा पूंजीपतियों के लाभ के लिए केंद्रीय शक्तियों का दुरुपयोग खुले तौर पर किया – जिससे देश के संघीय ढांचे को पहुंची है चोट

देश में मौजूदा भाजपा शासन में जहां तमाम संस्थाओं की मौत हो चुकी है, तो वहीं उच्चतम न्यायालय पर भी सवाल उठे हैं. केंद्र की भाजपा सत्ता में धर्मनिरपेक्षता की भावनाओं पर चोट हुए और सांप्रदायिक ताकत प्रबल हुए हैं. साथ ही सत्ता और पूंजीपतियों की मैत्री गठजोड़ के मद्देनजर, केंद्र द्वारा मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए तानाशाही तौर पर, शक्तियों का दुरुपयोग हुआ. इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि केंद्र ने अपनी मंशा को पूरा करने के लिए संघीय व्यवस्था की अनदेखी की. जिसका खामियाजा राज्यों को उसके संसाधन लूट के रूप में भुगतना पड़ा. 

इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि देश भर में झारखंड और बंगाल द्वारा केंद्र की मंशा को सबसे अधिक चुनौती मिली है. इन्हीं कारणों से ये दोनों राज्य भाजपा को सबसे अधिक खटक भी रहे हैं. साथ ही, झारखंड में चुनावों में लगातार हार और अब बंगाल चुनाव में भी भाजपा की हार, भी एक वाजिब वजह है. इसके अलावा झारखंड और बंगाल द्वारा अधिकारों की मांग को बिना डरे माँगा जाना भी भाजपा के मनुवादी विचारधारा पचा नहीं पा रही है. ऐसे में भाजपा सांसद व राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव के बयान में भाजपा की छटपटाहट का साफ़ तौर पर महसूस किया जा सकता है.

झारखंड और बंगाल केंद्र के तानाशाह रुख के विरुद्ध मजबूती से हैं खड़े 

झारखंड और बंगाल केंद्र के तानाशाह रुख के विरुद्ध जनहित के मद्देनजर मजबूती से खड़े हैं, जहाँ आमतौर पर बाकी राज्य झुकते आये हैं. केंद्र का गैर भाजपा शासित राज्यों से सौतेला व्यवहार और मनमाना रवैया, देश में असंतोष को बढ़ा दिया है. फैसले लेने की प्रक्रिया में राज्यों के स्वतंत्रता का हनन, उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाना, इसी सच को दर्शाता है. महज चंद दिनों पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा संपन्न वर्चुअल बैठक को इंगित करते हुए सवाल भी उठाया गया था. ऐसे में केंद्र द्वारा मुख्यमंत्रियों का अपमान किया जाना, संघीय ढांचा के प्रति केंद्र की किस मानसिकता को दर्शाता है.

हेमन्त सोरेन – केंद्र कोरोना महामारी में अभिभावक का फर्ज अदा नहीं कर पा रहा  

मसलन, मौजूदा दौर में जब जीने के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ही केंद्रीय सत्ता के मंशे पर सवाल उठा दे. तो राज्यों की पीड़ा की स्थिति को ज़रुर समझा जा सकता है. चूँकि केंद्र के पास आर्थिक ताक़त होने के कारण वह तानाशाह तरीके से राज्यों पर अपने फैसलों थोप रहा है. लेकिन, पानी सर से ऊपर होने की परिस्थिति में झारखंड और बंगाल जैसे राज्य, मुखर हो अपनी पीड़ा जाहिर कर रहे है. जैसे-जैसे जनता को सच्चाई का पता चल रहा है, भाजपा में बौखलाहट बढ़ती जा रही है. और संघ-भाजपा की परपंचीय विचारधारा के अनुरूप, भूपेंद्र यादव द्वारा संघीय व्यवस्था के डिगने का दोष इन दोनों राज्यों के सर मढ़ना, देश को बरगलान का मात्र प्रयास भर है.

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