रोजगार सृजन के लिए लाये हेमंत सरकार की योजनाओं से राज्यवासियों को मिल रहा है त्वरित लाभ

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नीलांबर पीताबंर जल समृद्धि, बिरसा हरित ग्राम, वीर शहीद हो खेल विकास और दीदी बाड़ी योजनाओं का बेहतर प्रदर्शन

फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का असर, हड़िया-दारू बेचना छोड़ मछली पालन व वनों के उत्पाद से जुड़ी 7115 महिलाएं

रांची। कोरोना काल का सबसे ज्यादा प्रभाव राज्य के लोगों के रोजगार पर पड़ा था। लाखों लोग इस वैश्विक महामारी के प्रभाव में बेरोजगार हो गये थे। ऐसे में इन्हें अपने ग्रामीण परिवेश में ही रोजगार उपलब्ध कराना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। हेमंत ने इच्छाशक्ति से सीमित संसाधनों के बावजूद इन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाओं की शुरूआत की थी। 

नीलांबर पीताबंर जल समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना, वीर शहीद हो खेल विकास योजना, दीदी बाड़ी योजना और फूलो-झानो आशीर्वाद योजना प्रमुखता से शामिल हैं। इसमें दीदी बाड़ी योजना ग्रामीण और गरीब परिवारों को पोषण युक्त भोजन उपलव्ध करवाने तथा बेरोजगारी जैसी समस्या को दूर करने में रामबाण साबित हुआ है। वहीं फूलो-झानो आशीर्वाद योजना ने राज्य के महिलाओं को एक सम्मान के साथ जीने की राह खोली है। 

मनरेगा के तहत शुरू की गयी थी अधिकांश योजनाएं, सभी का रिजल्ट रहा है बेहतर

बता दें कि कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर रोजगार दिलाने में हेमंत सरकार ने मनरेगा योजना अंतर्गत वर्ष 2020-21 में ही उपरोक्त योजनाओं को लागू किया था। इन योजनाओं का रिजल्ट काफी बेहतर रहा है। ग्रामीण विकास अंतर्गत संचालित इन योजनाओं की सफलता की जानकारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक समीक्षा बैठक में सामने आ चुकी है। 

ज्ञात हो कि 

  • नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना के तहत 1 लाख हेक्टेयर बंजर भूमि का संवर्धन लक्ष्य रखा गया था, जबकि उपलब्धि 1.94 लाख हेक्टेयर की रही। 
  • बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 20 हजार एकड़ में रैयती भूमि पर फलदार पौधे लगाने का लक्ष्य था, जिसकी तुलना में 26 ,000 एकड़ में यह काम हुआ।
  • वीर शहीद पोटो हो खेल विकास योजना के तरह 1000 मैदान विकसित करने का लक्ष्य था,  जबकि 1881 खेल मैदान बनाए जा चुके हैं। 
  • दीदी बाड़ी योजना के तहत 5 लाख पोषण वाटिका बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

फूलो-झानो आशीर्वाद योजना : 3 माह में 7115 महिलाओं ने हड़िया-दारू बनाना और बेचना छोड़ा

फूलो-झानो आशीर्वाद योजना भी ग्रामीण विकास विभाग के झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) द्वारा संचालित है। योजना में हड़िया-दारू बेचने वाली महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जा रहा है। सितंबर-2020 में शुरू हुए योजना के सकारात्मक परिणाम केवल तीन माह में दिखने लगे है। 

योजना के तहत सखी मंडल बहनों द्वारा मिशन नवजीवन सर्वेक्षण किया गया। इसमें राज्य की 16,549 महिलाओं की हड़िया-दारू बेचने के रूप में पहचान कर इनकी काउंसलिंग शुरू की गई थी। जिसमें अबतक कुल 7115 महिलाओं ने हड़िया-दारू बनाना और बेचना छोड़ दिया है। और अपनी आजीविका के लिए ये महिलाएं सरकार के योजना के तहत विभिन्न साधनों से जुड़ लाभांवित हुई है। अब ऐसी महिलाएं सूक्ष्म उद्यम, कृषि आधारित आजीविका, वनोपज संग्रहण, पशुपालन,  मछलीपालन एवं अन्य आजीविका के साधनों से जुड़ रही है।  

फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान के तहत ऋण की राशि बढ़ाई जाए, मिलेगा फायदा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मानना है कि फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के तहत आजीविका गतिविधियों से महिलाओं को जोड़ने के लिए ब्याजमुक्त ऋण की राशि में बढ़ोत्तरी जरूरी है। बता दें कि इन महिलाओं को करीब सभी महिलाओं को 10 हजार रुपये तक ब्याज मुक्त लोन और अतिरिक्त राशि भी सामान्य दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री की ऋण बढ़ोतरी के सुझाव से भी महिलाओं को काफी फायदा मिलेगा।

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