अल्पसंख्यक

सीएम हेमंत के प्रयासों से 38 माह बाद मिलेगा 700 अल्पसंख्यक शिक्षकों को मानदेय

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तमाम वर्गों के शिक्षकों के अधिकारों के लिए लगातार प्रयासरत है सीएम हेमंत व उनकी सरकार

राँची। 2013 में पहली बार जब हेमंत सोरेन ने झारखंड की बागडोर संभाली, तो उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार राज्य के हर समुदाय के विकास के प्रति कटिबद्ध है। यह 13 वर्षों से उपेक्षित रहे वर्गों के लिए राहत देने वाली खबर थी। और हेमंत की वह सरकार अपने अल्प काल के कार्यकाल में तमाम वर्गों के बहुत कुछ कर अपने वादे पर खरी उतरी थी। 

इसका फ़ायदा राज्य के अल्पसंख्यक वर्गों को भी मिला था। 2014 के चुनाव में सत्ता में नहीं आने के बावजूद वह अपने वादों से पीछे नहीं हटे। एक बार फिर झारखंडी जनता ने उनके धर्मनिरपेक्ष हाथों में राज्य की बागडोर सौंपी है। वर्तमान हेमंत सरकार की कार्यशैली से पता चलता है कि वे अब भी सर्वे भवन्तु सुखिनः के एजेंडे पर कायम है। 

मसलन, 38 माह से वेतन की राह तकने वाले अल्पसंख्यक शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों के अधिकारों को अंजाम तक पहुंचाना, उनकी यही मंशा साबित करता है। ज्ञात हो, हेमंत सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन मद में अनुदान राशि जारी कर न केवल झारखंडी भावना को रुसवा होने से बचाया बल्कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना का लाज भी रखी है। 

अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को भी झामुमो ने घोषणापत्र में दिया था स्थान

हेमंत की वर्तमान सरकार में अल्पसंख्यक समुदाय के वर्गों के अधिकारों को समानुपातिक न्याय मिलता दिखता है। बोखलाहट में रघुवर दास जिसे धर्मांतरण बढ़ावा से जोड़ रहे हैं। लेकिन सच यह है कि झामुमो के चुनावी घोषणा पत्र में धर्मनिरपेक्षता का जिक्र है, वह उसे पूरा कर रहा हैं। 

उनके द्वारा रघुवर राज में भीड़तंत्र के शिकार ख़ास वर्ग के लोगों की सुरक्षा के लिए कठोर कानून बनाने के आदेश दिया गया है। तमाम अल्पसंख्यक वर्ग की शिक्षा पर भी यह सरकार प्रयासरत है। साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड समेत अल्पसंख्यक संस्थानों को अनुदान देने के दिशा में लगातार काम कर रही है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री हाजी हुसैन अंसारी सह झामुमो के आन्दोलन काल के सिपाही, पहली पीढ़ी के इस नेता ने अपने बयान में कहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय वर्ग के विकास के लिए राज्य में जल्द ही अल्पसंख्यक विभाग बनेगा।

183 अल्पसंख्यक विद्यालयों के अनुदान का फैसला 2017 से लटका था

बीजेपी की डबल इंजन रघुवर सरकार में, 2017 से ही राज्य के कई अल्पसंख्यक विद्यालयों को अनुदान मिलने बंद हो गए थे। उस सरकार का इस सम्बन्ध में दलील था कि अल्पसंख्यक विद्यालय अनुदान पाने के लिए आवश्यक शर्ते व अर्हता पूरी नहीं करती है। जो शिक्षा के अधिकार पर विद्वेष की भावना से प्रहार का स्पष्ट उदाहरण हो सकता है। 

ज्ञात हो कि जुलाई माह 2020 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कमिटी का गठन कर अनुदान से जुड़े तमाम मसलों पर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग को दिया था। विभाग द्वारा रिपोर्ट तैयार कर सीएम को भेजा दिया गया है। खबर है कि कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को भेजने की स्वीकृति भी मुख्यमंत्री ने दे दी है। 

58 करोड़ रूपये अनुदान के लिए हुए जारी

हेमंत सरकार के निर्देश पर विभागीय मंत्री जगरनाथ महतो ने मदरसों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों के मानदेय भुगतान के लिए 58 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। कुल 183 अल्पसंख्यक विद्यालयों के लिए जारी इस अनुदान राशि से राज्य के 425 शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों के लिए 38 महीने के बाद मानदेय भुगतान का रास्ता साफ़ हुआ है। 

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