सीमित संसाधनों के बीच 1.54 लाख लोगों का सैंपल लेकर हेमंत सरकार ने बनाया रिकॉर्ड

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रिकॉर्ड

सीमित संसाधनों के बीच 1.54 लाख लोगों का सैंपल लेकर हेमंत सरकार ने बनाया रिकॉर्ड 

सीमित संसाधनों के बावजूद कोरोना संकट में हेमंत सरकार बना रही रिकॉर्ड – 1.54 लाख लोगों का सैंपल ले बनाया इतिहास

पहले प्रवासी मज़दूरों के लिए ट्रेन चला कर और एयरलिफ्ट कराकर रचा चुकी है इतिहास

राँची। कहते हैं सच का अक्स अँधेरे में रखे आईने में भी चमकता है। हेमंत सोरेन सरकार कोरोना महामारी से निपटने हेतु लगातार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री के कार्यशैली दर्शाते हैं कि वे कोरोना संकट की मार झारखंडवासियों पर कम से कम पड़ने देना चाहते हैं। सीमित संसाधनों के हकीकत समझते हुए भी हेमंत सरकार का इस महामारी से निपटने के लिए जुझारू प्रयास लगातार जारी है।

इन्हीं प्रयासों के कारण, जब कोरोना ने देश भर में अपना प्रचंड प्रकोप दिखाया, तब दूसरे राज्यों के मुकाबले झारखंड में कोरोना का कम असर दिखा। और अब जब राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है, तो स्वास्थ्य विभाग भी उसी तेजी से संक्रमित मरीजों के सैंपल लेने की दिशा में न केवल काम कर रहा है, बल्कि सफल भी हो रहा है।

सोमवार का दिन राज्य के लिए ऐतिहासिक रहा, क्योंकि उस 1 दिन में रिकॉर्ड 1.50 लाख से अधिक लोगों का सैंपल लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सीमित संसाधनों के बीच एक दिन में इतने कोरोना सैंपल का जांच कोई आसान काम नहीं है। यह स्वास्थ्य विभाग के ईमानदार प्रयास से ही मुमकिन हो पाया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने उम्मीद जतायी है कि शायद यह देश भर में एक दिन में किया गया सबसे ज़्यादा कोरोना टेस्ट हो सकता है। एक मुख्यमंत्री के नाते उन्होंने एकबार फिर राज्यवासियों को भरोसा दिलाया है कि राज्य सरकार झारखंड की सेवा, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति कटिबद्ध हैं।

यह पहली बार नहीं है जब हेमंत सरकार ने रिकॉर्ड बनाया है

कोरोना संकट के दौरान हेमंत सरकार द्वारा बना यह एक मात्र रिकॉर्ड नहीं है। अभी तक के अपने 8 माह के अल्प कार्यकाल में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कई ऐतिहासिक फैसले ले चुके हैं। देशव्यापी लॉकडाउन दौरान उन्होंने प्रवासी मजदूरों के घर वापसी के लिए ट्रेन चलाने, एयरलिफ्ट कराने जैसे नामुमकिन माने जाने वाले फैसले लेकर साबित किया है। 

ऐसा भी नहीं है कि हेमंत सरकार के फैसलों में केंद्र की कोई मदद मिली हों। ज्ञात हो कि न केवल केंद्र से बिना कोई विशेष आर्थिक सहायता के बल्कि सुझबुझ के साथ उससे जूझ के तमाम ऐतिहासिक फ़ैसलों को हेमंत सरकार ने मुमकिन बनाया है। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि मुख्यमंत्री ने अपने पुरुषार्थ के बलपर यह कर दिखाया है।

लॉकडाउन की अवधि में राज्य सरकार द्वारा गरीब व असहाय लोगों के लिए शुरू की गयी दीदी किचन योजना देश भर में एक मिसाल बन कर उभरा है। इस योजना की शुरुआत तब हुई जब राज्य के करोड़ो लोग बेरोज़गार हो चुके थे। वह भूखे के कारण मौत के मुहाने पर खड़े थे। साथ ही हेमंत सरकार ने रोज़गार की दिशा में भी कदम बढाते हुए कई रोजगारजनित योजनाएं शुरू की। 

केंद्र से हमेशा मांगा गया मदद, लेकिन झारखंड को मिलता रहा कूटनीति

कोरोना से लड़ाई के लिए मुख्यमंत्री ने राजनीति से परे केंद्र से हर संभव मदद की मांग की। लेकिन अमूमन हर बार झारखंड को निराशा ही हाथ लगी। कोरोना संकट के इस दौर में जब झारखंड अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा था, तब भी केंद्र अपनी कूटनीति-लूटनीति से बाज नहीं आया। 

राज्य की संपत्ति को लूटने के लिए केंद्र ने कोई कसार नहीं छोड़ी। कोल ब्लॉक नीलामी इसी सिलसिले का एक हिस्सा था। राज्य के होने वाले नुकसान को देख हेमंत सरकार ने सूरज के सामने दिया बन केंद्र से हर मोर्चे हिम्मत से लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट के दहलीज तक गयी और जनता के अधिकार सुरक्षित किए। कोल ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया फिलहाल टाल दिया गया है।

झारखंड का केंद्र की राजनीति के भेंट चढ़ने का मुख्य कारण यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मोदी सरकार के उन तमाम जनविरोधी नीतियों के मुखर विरोधी रहे है, जो ग़रीबों, छात्रों, दलितों-आदिवासियों बहुजनों, दबे-कुचले जैसे लोगों के खिलाफ थे।

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