बिहार माइका एक्ट -1947 को परिभाषित करने की आवश्यकता : सुदिव्य कुमार

आज़ादी के बाद एकीकृत बिहार के समय ही ‘Bihar Mica Act -1947’ बनाया गया था, जो आज भी झारखंड राज्य में प्रभावी है। इसलिए नए झारखण्ड के समस्याओं को देखते हुए माइका ढिबरा फ्लेक्स को सही ढंग से परिभाषित करने की आवश्यकता है।

क्या है बिहार माइका एक्ट -1947

  • बिहार माइका एक्ट में माइका के विभिन्न स्वरूपों की व्याख्या की गयी है जिसमें स्पष्ट रूप से पारा 3 में उल्लेखित है कि 6 वर्ग इंच से छोटी माइका खनिज की श्रेणी में नहीं आती है, एवं इसके भण्डारण, प्रसंस्करण, व्यापार एवं परिवहन पर खनिज कानून लागू नहीं होगा।
  • झारखंड विधानसभा के दिनांक 26-12-2018 के तारांकित प्रश्न संख्या 15 के प्रत्युत्तर में खनन एवं भूतत्व विभाग ने यह स्वीकार किया कि ‘माइका ढिबरा’ लघु खनिज की श्रेणी में नहीं आता है।
  • 2018 में JSMDC द्वारा इसकी नीलामी के वक़्त भी स्पष्ट रूप से दर्शाया गया था कि ‘ढिबरा’ किसी खनिज की श्रेणी में नहीं आता है।
  • वर्ष 2017 में खनन एवं भूतत्व विभाग द्वारा कराये गए सर्वेक्षण में पाया गया था कि गिरिडीह एवं कोडरमा जिलान्तर्गत जिन स्थलों पर 1980 ई. तक माइका की खाने संचालित हो रही थीं, उस क्षेत्र में 20 लाख टन से भी ज्यादा ढिबरा का ढेर लगा हुआ है। जिसका 80% ढेर वन भूमि और 20% रैयती एवं गैर मजरुवा भूमि पर हैं।

वर्तमान में स्पष्ट व्याख्या के अभाव के कारण ढिबरा/माइका के व्यापार, परिवहन, भण्डारण और प्रसंस्करण को अवैध माना जाता है। इसलिए मृत पड़े माइका उद्योग को थोड़ी राहत देते हुए बिहार माइका एक्ट को फिर से परिभाषित से करने की आवश्यकता है। 

झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र 

सुदिव्य कुमार,बिहार माइका एक्ट
Sudivya Kumar Sonu -MLA Giridih JMM

उपरोक्त तमाम बिन्दुओं को उठाते ही गिरीडीह के झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। जिसमे उन्होंने सुझाव दिया हैं कि यदि इसे लघु खनिज की श्रेणी से बाहर लाते हुए वन उत्पाद के रूप में परिभाषित कर दिया जाए तो माइका व्यवसाय को फिर से पुनर्जीवित किया जा सकेगा। जिससे न केवल राज्य में लाखों की संख्या में रोज़गार उत्पन्न होंगे। राजस्व वृद्धि व निर्यात को बढ़ावा मिल सकेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि ढिबरा को परिभाषित करते हुए यथाशीघ्र खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा एक स्पष्ट अध्यादेश जारी किए जाए।

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