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कोरोना

मोदी आहार जैसे प्रोपगेंडा राज्य में दे रही है काला बाजारी को बढ़ावा

मोदी आहार जैसे चेहरा चमकाने वाली प्रोपगेंडा राज्य में काला बाजारी को बढ़ावा दे महंगाई बढाने में मदद करेगी  

कोरोना जैसी महामारी के वक़्त भी भाजपा अपनी ओछी राजनीति से बाज आती नहीं दिखती है। एक तरफ जहाँ केंद्र इससे संबंधित कोई फैसला लेने में मध्यप्रदेश में सरकार बनने का प्रतीक्षा करती रही। जो दुनिया भर में उसकी किरकिरी होने लगी तो नोट बंदी के तर्ज पर बिना राज्य सरकारों के सलाह लिए देश भर में लोकडाउन घोषित कर दिया। नतीजा एक त्रासदी के रूप में हर प्रदेश में फंसे मज़दूर जैसे समस्या हमारे सामने आ खड़ी हुए है। इतना ही नहीं भाजपा के आईटी सेल बेलगाम हो झूठी ख़बरों को किस प्रकार सोशल मीडिया के प्लेटफोर्मो के माध्यम से फैला रही है किसी से छिपा नहीं है। 

लेकिन इसके बीच झारखण्ड में राहत देने वाली खबर यह है कि हेमंत सोरेन ने उन लोगों की आवेदन का जानकारी अधिकारियों माँगे हैं, जिन्होंने आवेदन तो किया था लेकिन अब तक उनका राशन कार्ड नहीं बन पाया है। जिनकी संख्या 7 लाख है, और इन्हें भी 10-10 किलो की राशन देने की व्यवस्था की है। यही नहीं झारखण्ड के राशन कार्ड धारी परिवारों को 2 माह की अग्रिम राशन देने का भी निर्णय लिया है। जिससे राज्य के लगभग 90 प्रतिशत परिवारों को लाभ मिलेगा और वे घर में सुरक्षित रह कर इस विपदा से लड़ सकेंगे।

हेमंत सरकार झारखण्ड में हो रही काला बाजारी से भी लगातार निपटने का प्रयास कर रही है। लेकिन, यदि इस विपदा में भी भाजपा मोदी आहार जैसे प्रोप्गेंडे से बाज नहीं आ रही है। यदि वह अपना चेहरा चमकाने के लिए ऐसा करती रही तो जाहिर राज्य में खाद्य सामग्री का संतुलन बिगड़ेगा और काला बाजारी में वृद्धि होगी। अगर वाकई वह मोदी आहार के माध्यम झारखंडियों की मदद करना ही चाहते हैं तो वह सरकार के साथ मिलकर आंकड़ावार तरीके से लोगों की मदद करें। ताकि अलग बीन बजाने के बजाय इस आपदा से मिलकर मज़बूती के साथ लड़ा जा सके। 

मसलन, जितना जल्दी हो हम यह समझ जाएँ कि कोरोना महामारी जैसे आपदा ने एक बार फिर यह साबित करता है कि विज्ञान की तरक़्क़ी के बावजूद, पूँजीवाद नयी बीमारियों को फैलने के लिए ज़मीन पैदा कर रहा है। ऐसी महामारियों से निपटने के लिए समाजवादी समाज का निर्माण आज मनुष्यता की ज़रूरत बन गया है। और सभी एक हो कर ही इस महामारी को फैलने से रोक सकते है। 

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