संक्रमितों की संख्या बढती गयी, केंद्र मध्यप्रदेश में सरकार बनने की प्रतीक्षा करती रही 

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कोरोना

देश में संक्रमितों की संख्या बढती गयी और केंद्र मध्यप्रदेश में सरकार बनने की प्रतीक्षा करती रही 

सरकारें अपनी चौकसी व बेहतर सार्वज‍निक स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम कोरोना वायरस (COVID-19) जैसे  संक्रमण को महामारी में तब्दीलहोने से रोक सकती थी। लेकिन मौजूदा दौर में दुनिया भर में निजीकरण के नीतियों के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था अपनी अंतिम साँसें गिन रही है। नतीजतन शुरूआती दौर में उचित ढंग से इस बीमारी की रोकथाम न हो सकी। और अंत में यह सच उभर कर सामने आया कि कोरोना वायरस दुनिया भर में अपना प्रकोप दुनियाभर में तेज़ी से बढाने में सफल हुआ है।

आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ‘पैण्डेमिक’ (वैश्विक महामारी) घोषित कर दिया है। इस महामारी ने अब तक अंटार्कटिका को छोड़कर लगभग तमाम महाद्वीपों को अपनी चपेट में ले चुकी है। अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमण 164,253 के पार होने के बाद आख़ि‍रकार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी है। इस तथ्य से भी यह समझा जा सकता है कि स्थिति कितनी ख़तरनाक संगीन हो चुकी है। आज विश्व भर में कोरोना वायरस से सं‍क्रमित लोगों की संख्या 785,777 हो चुकी है और 37,815 से ज़्यादा लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।

भारत की केंद्र सरकार तो इसके अलग तीसरी दुनिया की साकार साबित हुई। एक तरफ देश में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या बढती जा रही थी और वह फैसले लेने के लिए मध्यप्रदेश में अपनी सरकार बनने का प्रतीक्षा कर रही थी। जब इण्डिया टाइम्स ने सरकारी आंकड़ों से अधिक संक्रमितों की होने की बात कही तो सरकार ने आननफानन में लोकडाउन की घोषणा कर दी। इसमें दिलचस्प बात यह रही कि नोट बंदी की ही तरह इस फैसले में भी न राज्य सरकारों के साथ बैठक की और न ही कोई सलाह ली। जिसके कारण भारी संख्या में दूसरे राज्यों में मजदूर फंस गए। आज उनकी मौतों की संख्या नोट बंदी से हुए मौतों की संख्या से पार कर चुकी है। 

मसलन, राज्य सरकारें अपने मजदूरों को अपने राज्य बुलाने में असफल रहे। और दूसरी तरफ राज्य सरकार अपने लोगों को दूसरे राज्य में जो मदद पहुंचाने की जो पहल कर रहे हैं वह सफल नहीं हो पा रहे हैं। सभी राज्य सरकारें संसाधन के अभाव में खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं। यह भी सच है कि आने वाले दिनों में इस महामारी के तेज़ी से फैलने के आसार हैं। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि हिन्दुस्तानी नागरिकों के आने वाले वक़्त में स्थिति क्या होने वाली है।

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