झारखंड

हेमंत सरकार की लकीर पर भाजपा के सवाल

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भाजपा हेमंत सरकार से कौन सी लकीर बड़ा करवाना चाहती है बताएं

आपको नौकरी मिली – नहीं मिली। किसानों को खून पसीने की कमाई मिली – नहीं मिली। महँगाई से निजात मिली – नहीं मिली। बिना घूस के काम होता है – नहीं होता है। घोटाला रुके – बढ़ गए। क्या उन्होंने साठ महीने माँगे थे – हाँ हमने दिए, जहाँ इनके व्यवस्था की रेखाओं में नारों से सुर मिलाते जनता को लगाने लगा कि अच्छे दिन के बजाय सत्ता ने उसे धोखा दिया है। तो क्या पिछली सत्ता के पास विकास का कोई ऐसा मॉडल थी ही नहीं जिसके आसरे समाज की विषमता को थामा जा सके। यकीनन झारखंड में यही सवाल हर किसी के सामने मुँह बाए खड़ी दिखी, जिसके अक्स तले समाज को हासिये पर धकेलना सत्ता की फितरत बन गयी। ऐसे भाजपा प्रदेश प्रवक्ता का हेमंत सरकार के 50 दिनों के कार्यकाल में उनके सरकार द्वारा खींची गयी किस रेखा को बड़ा नहीं किया गया, को बिन स्पष्ट किये आलोचना किया, यह समझ से परे है। 

झारखंड में जिस प्रकार भाजपा के बजाय मोदी के जीत को सामने रखा गया, उसमे पहली बार यह संकेत उभरा कि किसी तरह सत्ता में काबिज होना ही सबसे महत्वपूर्ण है। जहाँ पहली बार गैर आदिवासियों के अनकही कहते हुए आदिवासियों का सवाल उठाया गया और सीएम के तौर पर कॉर्पोरेट के चाकर गैर आदिवासी को चुन लिया गया। जहाँ मंत्रालय को मंत्री सौपने में 53 दिन लगा दिए गए। जहाँ नौकरशाही और कॉर्पोरेट के बीच मंत्रियों को नीतियाँ लागू कराने के लिए फाइलों पर चिड़िया उड़ाने वाली सोच के साथ कैसे ले जाया जा सकता है, मशक्कत करते दिखी। ऐसे में भाजपा प्रवक्ता को परखते हुए हेमंत सरकार के 50 दिन के कार्यकाल पर एक दृष्टि डाल समीक्षा कर लेना चाहिए। 

झारखंड की हेमंत सरकार द्वारा 50 दिनों के भीतर लिए गए फैसले :

  1. पत्थलगड़ी के दौरान देशद्रोह के तहत दर्ज मामले वापस लिए गए।
  2. मुख्यमंत्री ने गॉर्ड आफ ऑनर की परंपरा को समाप्त करने की घोषणा की।
  3. स्थानीय नीति व नियोजन नीति को विवादास्पद मानते हुए समीक्षा करने की घोषणा की।
  4. दो लाख तक किसानों के कर्ज माफ करने, 100 यूनिट बिजली निशुल्क देने, आदिवासियों को वन पट्टा देने, फ़र्ज़ी राशन कार्ड के जरिये किये जा रहे खाद्यान्न की गड़बड़ी की जांच करने, प्रज्ञा केंद्र से तुरंत सभी तरह के सर्टिफ़िकेट बनाने, कोयला की शेष राशि करीब पांच हजार करोड़ रुपया नहीं मिलने पर झारखंड का कोयला नहीं भेजने की चेतावनी दी।
  5. पारा टीचर को जल्द ही स्थायी व मानदेय में बढ़ौतरी किये जाने का आश्वासन दी गयी।
  6. साहसिक कदम उठाते हुए बंद किये गए स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला लिया गया।
  7. बेरोज़गारी भत्ता प्रदान करने के लिए बेरोगारों को चिन्हित के लिए नियोजन कार्यालय को मजबूत व सुलभ करने का फैसला लिया गया।
  8. विस्थापित परिवारों को नौकरी से वंचित न रहे, सरकार भूमि अधिग्रहण बिल की भी समीक्षा कर रही है।
  9. नयी सत्ता के लिए ख़ज़ाना खाली था। सीएम ने फ़िज़ूलखर्ची  पर रोक लगाते हुए आमद के नये रास्ते ढूंढे। उन उपयोगी योजनाओं को बंद किया गया।
  10. डोभा निर्माण की, तालाब निर्माण व पथ निर्माण विभाग में गड़बड़ी की जांच के आदेश। मुख्य अभियंता समेत दो का निलंबन करने जैसे कड़े फैसले लिए गए। 
  11. सरकार में जेपीएससी में नियुक्तियां के प्रयास तेज हुए।

मसलन, नवनिर्वाचित सीएम द्वारा झारखंड को विकास की ओर ले जाने के लिए जो लंबी लकीर खींचने का प्रयास किया गया है, वह कितना कारगर है यह तो आप जनता को ही आखिरकार तय करना है। 

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