एआईएमआईएम के खिलाफ विवादास्पद बयान दे भाजपा दिखावा करती है 

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एआईएमआईएम

अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले केन्द्रीय मंत्री गिररिाज सिंह ने शुक्रवार को बिहार के लोगों को सचेत करते हुए ट्वीट किया, “बिहार के उपचुनाव में सबसे खतरनाक परिणाम किशनगंज से उभर कर आया है। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम जिन्ना की सोच वाली है, ये वंदे मातरम से नफरत करते हैं। इनसे बिहार की सामाजिक समरसता को खतरा है।” आगे लिखा, “बिहार वासियों को अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।”

पहली बात तो यह है भाजपा को देश के किसी चुने हुए नेता के बारे में ऐसा बयान नहीं देना चाहिए, यह असंवैधानिक है। दूसरी तरफ ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने एलान कर दिया है कि झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव में वह 50 विधानसभा सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारेगी। पार्टी ने महाराष्ट्र विधानसभा में चार सीटों के अलावा बिहार के किशनगंज लोकसभा सीट को भी अपनी झोली में डाला है। 

भाजपा  इस प्रकार के बयान, मजलिस को मुसलमानों का पार्टी बताकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करती रहती है। लेकिन, देखा जाए तो यह शीशे की तरह साफ़ है कि ऐसे बयान देकर भाजपा चुनाव में एआईएमआईएम को वोटों के धुर्विकरण के लिए एक हथियार के तरह प्रयोग करती है। क्योंकि एआईएमआईएम का वोट क्षेत्र ऐसी जमात होती है जो कभी भी भाजपा के परम्परागत वोट बैंक नहीं माने जाते। यानी कि मजलिस अपने वोट के लिए सीधा सेंधमारी विपक्ष के वोट बैंक पर करती है, जिसका लाभ खुले तौर पर भाजपा को ही होता दीखता है।  

ऐसे में यदि झारखंड में एआईएमआईएम विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारती है तो यह भाजपा के लिए ओक्सिजन का काम करेगी। तत्कालिक परिस्थितियों  में इस दल का प्रत्याशी मजबूत दिख रही झामुमो को सीधा क्षति पहुँचाते हुए भाजपा को कई सीटों में जीत दिलवाने का काम करेगी। जिससे भाजपा आसानी से फिर एक बार राज्य में सरकार बना सकती है। झारखंडी आवाम को सावधान रहने की जरूरत है।  

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