गोदी मीडिया के लिए क्यों मंदी से ज्यादा जरूरी है हेमन सोरेन के ब्यान को तोड़ना मरोड़ना   

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गोदी मीडिया

भले ही भाजपा के प्रवक्ता को 5 ट्रिलियन में कितने जीरो होता है नहीं मालूम लेकिन गोदी मीडिया के पाँच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के कानफाड़ू शोर झारखंड में जरूर गूँज रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि देश के अन्य राज्यों की भाँती झारखंड की अर्थव्यवस्था भी मंदी के खाई में गिरती जा रही है। जनता को तबाही-बर्बादी के नरककुण्ड में धकेलकर आशीर्वाद यात्रा के अंतर्गत मुख्यमंत्री जी अपने पांच साल के रिपोर्ट में अपनी कारिस्तानी का बखान न करते हुए 370 व मोदी जी के गुण गा रहे है। साथ ही बिजली के आँख मिचौनी के लिए कांग्रेस को कोस रहे हैं, यह रघुवर गोदी मीडिया के लिए न्यूज़ नहीं है। 

मन्दी ग़रीब आबादी को महँगाई, बेरोज़गारी, छँटनी, तालाबन्दी जैसी सुरसा की खुली मुँह की तरफ निगलती जा रही है। ग़ैर-वित्तीय बैंकिंग संस्थाओं के बर्बाद होने के साथ शुरू हुआ संकट रियल एस्टेट सेक्टर, ऑटोमोबाइल सेक्टर, लघु और मध्यम उद्योगों, आईटी सेक्टर से होते हुए कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक, कंज़्यू्मर गुड्स कम्पनियों तक को अपनी ज़द में ले चुका है। यह भी गोदी मीडिया के लिए न्यूज़ नही है। इन सब न्यूजों से परे झारखंड की गोदी मीडिया इसमें परेशान है कैसे हेमंत जी के बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाए। 

हेमंत जी केवल अपने भाषण में इतना ही कहा कि आदिवासी हिन्दू नहीं हैं, जो कि उतना ही सत्य है जितना पूर्व दिशा से सूर्य का निकलना। जबकि जिनको इतिहास का मामूली ज्ञान हो उन्हें भी यह पता है।  आदिवासियों का अपना धर्म व संस्कृति है, उनकी अपनी भाषा व सामाजिक व्यवस्था है। ये प्रकृति-पूजक होते हैं जैसे वन, पर्वत, नदियों एवं सूर्य की आराधना करना हैं। हाँ यह सत्य है कि इनका धर्म सनातनी काल के नज़दीक है, जिससे हेमंत जी ने कभी इनकार नहीं किया। ऐसे में यह कहाँ सिद्ध होता है कि श्री सोरेन ने हिन्दू धर्म को नीचा दिखाया। अब गेरुवा वस्त्र पहन कर खुद को साधू कहने वाले दुष्कर्म करेगा तो क्या उसके बारे में आवाज उठाना भी गलत है। नहीं यह कभी गलत नहीं हो सकता। हाँ ऐसा करने से गोदी मीडिया की कलई जनता के समक्ष जरूर खुलती दिखती है। 

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