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पोस्टर वार

पोस्टर वार में भी भाजपा को झामुमो से मुंह की खानी पड़ रही है

आम चुनाव को लेकर अन्य राज्यों की भंति झारखंड में भी प्रचार प्रसार के अंतर्गत पोस्टर वार जोरों पर हैं और यहाँ के सारे खंभे पोस्टरों-बैनरों से पट दिया गया है। झारखंड में दिलचस्प यह है कि चुनाव प्रचार में बीजेपी को सड़कों पर इस पोस्टर वार में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) से चुनौती मिल रही है।इस राज्य में अब चुनाव केवल जनता के बीच नेताओं के भाषणों से नहीं लड़ा जा रहा, बल्कि पोस्टरों से पटे खंभो जैसे प्रचार माध्यमों की भी एक अहम भूमिका हो चली है। झारखंड में स्लोगनों और नारों में जेएमएम, बीजेपी से कहीं किसी स्तर पर पीछे नहीं दिख रही है। यदि बीजेपी के पोस्टरों और होर्डिंग्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह व मुख्यमंत्री रघुबर दास छाए हैं, तो वहीं झामुमो (JMM) के पोस्टरों में दिशोम गुरु शिबू सोरेन व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि भाजपा के कई पोस्टरों में स्थानीय नेताओं को जगह न मिलना कई सवाल खड़े जरूर कर रहे हैं।  

झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य कहते हैं कि उनकी पार्टी वर्तमान में हर स्तर पर नवीनतम तकनीक का प्रयोग करते हुए पोस्टर वार के तहत पोस्टरों-बैनरों के माध्यम से यहाँ की जनता तक अपना विजन व पार्टी की विचारधारा पहुंचाने का काम कर रही है। साथ ही झारखंड के गरीब-आदिवासी-दलित-मूलवासियों को भाजपा द्वारा बरगलाने वाले हर हथकंडे का सटीक व माकूल जवाब भी दे रही है। हालांकि, विपक्ष से बराबर की टक्कर मिलने पर, जिसका उन्हें तनिक भी अंदाजा न था, बीजेपी नेता अपने सुर बदल कर कहने लगे हैं कि जनता पर कौन हावी है यह खम्बों पर व चौक-चौराहे पर पोस्टरों-बैनरों के माध्यम से हावी होने से पता नहीं चलेगा, परिणाम बता देंगे कि किस दल के नेता ज्यादा जुझारू व लोकप्रिय हैं। बहरहाल, बीते दिनों पहले चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री व उनके जत्थे को स्थानीय लोगों नारे (काम नहीं तो वोट नहीं) लगा कर जिस प्रकार अपनी मंशा को जाहिर करते हुए वापस लौटने पर विवश किया, निस्संदेह भाजपा के नेता व उनके समर्थकों को भलीभांति अनुमान करवाया कि इस दफा मुर्गे किसके मुंडेर पर बांग देने वाली है।    

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