प्रज्ञा ठाकुर

प्रज्ञा ठाकुर का विवादित बयान कविता करकरे के बयान को बल देती है

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मालेगांव धमाकों की अभियुक्त प्रज्ञा ठाकुर का भोपाल से बीजेपी उम्मीदवारी तय होते ही उन्होंने शहीद हेमंत करकरे को लेकर विवादित बयान दिया कि उनके श्राप के कारण आतंकवादियों ने उन्हें माराशहीद हेमंत करकरे 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले में शहीद हो गए थे उनके शौर्य और पराक्रम के लिए भारत सरकार ने उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया था। प्रज्ञा के विवादित बोल के बाद शहीद करकरे की पत्नी कविता करकरे का सार्वजनिक मंच पर दिया गया बयान –उन्हें पुलिस द्वारा बतायी गयी कहानी कि हेमंत करकरे बाहरी आतंकवादियों के हमले में मारे गए- पर क़तई यक़ीन नहीं” फिर गरमा गया है।  

पूरे प्रकरण में ढेरों अनसुलझे सवाल हैं – जैसे करकरे की बुलेटप्रूफ़ जैकेट के साथ-साथ जैकेट इश्यू वाला रजिस्टर का भी खो जाना, करकरे, कामते और सालस्कर को होटल ताज की जगह कामा अस्पताल जाने का आदेश किसने दिया पता नहीं लगाया जाना, तीनों वरिष्ठ अधिकारियों का एक गाड़ी होना, रिपोर्ट में करकरे को पाँच गोलियाँ लगी पर शरीर में दो का ही मिलना और बाकियों के बारे में जज टहलियानी जिन्होंने कसाब को फाँसी की सज़ा सुनाई थी, द्वारा पूछे जाने पर भी पुलिस का कुछ नहीं बता पाना, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार एकदम पास से गोली मारा जाना, चारों गोली चलाने वाले का एक ही लाइन होना, कई सवाल खड़े करते हैं।

हेमंत करकरे ने न सिर्फ़ भगवा आतंकवाद की कड़ियों को सुलझाया था बल्कि वे भारतीय सेना में इनकी घुसपैठ के सबूत भी जुटा चुके थे। उन्हें 26/11 के हमले से ठीक दो दिन पहले फ़ोन पर धमकी मिली थी कि वे अपनी जाँच यहीं रोक दें वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहें। साथ ही गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गयी एक करोड़ की सहायता राशि भी स्वर्गीय कविता करकरे द्वारा ठुकरा दिया जाना। और ऐसे में निस्संदेह ‘साध्वी’ प्रज्ञा ठाकुर के बयान के बाद उनके आरोपों पर पुनर्विचार करने को प्रेरित करती है।

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