जन आरोग्य योजना : मोदी केयर या मोदी लूट

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जन आरोग्य योजना

बीते दिन मोदी जी का पदार्पण झारखण्ड में हुआ और वे एक इमानदार व्यापारी की भांति जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा बतासों के भाँति बांटे या दूसरे शब्द में कहें तो बेचे। सबके लिए स्वास्थ्य की व्यवस्था मुहैया कराने के बजाय 51 लाख ग़रीब परिवारों के लिए घोषित की गयी बीमा योजना का फ़ायदा कृषि बीमा की तरह बीमा कम्पनियों को ही होगा। स्वास्थ्य बीमा योजना स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्ण निजीकरण का ऐलान ही है, जिसका फ़ायदा निजी सामान्य बीमा कम्पनियों और मुनाफ़े के लिए मरीज के साथ कुछ भी करने को तैयार फ़ोर्टिस, अपोलो, जैसे निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों को ही होगा।

भारत देश में अभी स्वास्थ्य बीमा का काम नया है, पर इसकी हक़ीक़त तो पहले से ही बहुत ख़तरनाक है। स्क्रॉल की साईट में प्रकाशित रिपोर्ट में पहले की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का कुछ विवरण है। केवल बिहार में ही 16000 महिलाओं की गर्भाशय निकालने वाली ऑपरेशन का बीमा अस्पतालों ने लिया, कुछ के गर्भाशय झाँसे में फांस कर निकाल डाले, तो कुछ के ऑपेरशन केवल काग़ज़ों में ही हो गये!

कर्नाटक के कलबुर्गी जि़ले में 38 गाँवों के सर्वे हुए जिसमें पता चला कि 707 महिलाओं के गर्भाशय ही निकाल दिए गए, चौकाने वाली बात यह है कि इनमें लगभग 50 फीसदी महिलाओं की उम्र 35 वर्ष से कम थी। 20% की उम्र 30 वर्ष से कम थी। कुछ तो मात्र 20 साल की थी! इस प्रकार के मामले राजस्थान, आन्ध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड- पूरे देश में पकड़े जाने की खबर हैं। यह तो 25-30 हज़ार के बीमा की स्थिति थी।

अब ये आसानी से समझा जा सकता है पाँच लाख वाले बीमा में सरकार के प्रिय निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियां क्या-क्या जुल्म ढा सकती हैं, यह कल्पना तो फ़ोर्टिस, अपोलो, जैसे अस्पतालों के हाल में सामने आये मामले ही बता रहे हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के बदले बीमा का विचार स्वास्थ्य सुधारने का नहीं पूँजीपतियों को फ़ायदे पहुंचाने का विचार है! इसीलिए अस्पताल चलाने वाली और बीमा कम्पनियों के अनुसार जन आरोग्य योजना को सरकार द्वारा ग़रीब मरीजों के लिए उठाया गया विश्व का सबसे बड़ा क़दम बताया जा रहा है!

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