निजी स्कूलों की फ़ीस व पारा शिक्षकों को लेकर शिक्षा मंत्री की पहल

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पारा शिक्षकों

61 हजार पारा शिक्षक के स्थायीकरण को लेकर निर्णय

झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक हुई। जिसमें 61 हजार पारा शिक्षकों के स्थायीकरण करने पर सहमति बनी। विभाग अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट में भेजने की तैयारी कर रहा है।

बैठक में सेवा शर्तें व नियम पर विचार किया गया। शिक्षक पात्रता परीक्षा सफल पारा शिक्षकों को   स्थायीकरण और वेतनमान के लिए अतिरिक्त परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी। अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षकों को 5200 से 20200 वेतनमान के बराबर मानदेय दिए जाने पर सहमति बनी।

हालांकि, टेट असफल पारा शिक्षक के बारे में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस पर अंतिम निर्णय महाधिवक्ता की राय के बाद भी लिया जाएगा। साथ ही परीक्षा से संबंधित नियमों के प्रावधान के लिए भी महाधिवक्ता की राय लिया जाना शेष है। 

निम्नलिखित आपत्तियों पर सहमति बनी:

  • अब पारा शिक्षकों की आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा।
  • परीक्षा पास करने के लिए पारा शिक्षक को दो के बजाय तीन अवसर मिलेंगे।
  • पारा शिक्षक अब 60 साल तक सेवा दे सकेंगे।
  • महिला पारा शिक्षकों के लिए मातृत्व अवकाश की भी सुविधा होगी।

मसलन, झारखंड के पारा शिक्षकों का लंबा संघर्ष अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। पारा शिक्षकों को किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में झारखंड सरकार धीरे-धीरे लेकिन ठोस रूप से आगे बढ़ चली है।

निजी स्कूलों को केवल दो महीने की ट्यूशन फीस ही मिलेगी

निजी स्कूलों

शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो की अध्यक्षता में निजी स्कूल प्रबंधन और अभिभावक संघ की एक अलग बैठक हुई। जिसमें यह तय किया गया था कि लॉकडाउन अवधि के लिए माता-पिता को केवल दो महीने की ट्यूशन फीस निजी स्कूलों को देनी होगी।

यह शुल्क केवल उन स्कूलों के लिए मान्य होगा जो बच्चों को ऑनलाइन कक्षा की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। अप्रैल और मई के लिए, माता-पिता को स्कूलों बस किराया जैसे कोई अन्य शुल्क नहीं देनी पड़ेगी। इसका मतलब है, अब अभिभावक 12 महीनों के बजाय केवल 10 महीने की ही फ़ीस स्कूलों को देंगे।

हालांकि, शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि तालाबंदी अवधि की स्कूलों की फ़ीस को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सुप्रीम कोर्ट से जो भी फैसला आएगा झारखंड में भी उसे लागू कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में, निजी स्कूलों को वर्तमान में दो महीने की ट्यूशन फ़ीस लेने की अनुमति है।

बहारहाल,  झारखण्ड की हेमंत सरकार धीरे-धीरे ही सही लेकिन झारखण्ड को इस संकट के घडी में विकास के पथ पर ले कर न केवल जाती दिखती है। लोगों की भविष्य से जुड़े फैसले भी लेती दिखती है।

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